राहुल कुमार/न्यूज11भारत
चंदवा/डेस्क: प्रस्तावित बनहरदी कोल परियोजना क्षेत्र के बनहरदी गांव में दूध फैक्टरी के समीप बुधवार को वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 के तहत अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) निर्गत करने को लेकर ग्राम सभा आयोजित की गई. ग्राम सभा का आयोजन अपर समाहर्ता, लातेहार के पत्रांक 1666 के आलोक में किया गया था.
ग्राम सभा की अध्यक्षता ग्राम प्रधान इंद्रदेव उरांव ने की. बैठक में अंचलाधिकारी सुमित कुमार झा, अंचल निरीक्षक गोविंदा कुमार गुप्ता, मुखिया रमेश उरांव सहित प्रस्तावित कोल परियोजना प्रबंधन के कई वरीय पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.
जमीन के रिकॉर्ड में सुधार की मांग
बैठक के दौरान प्रस्तावित कोल परियोजना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली अधिसूचित वन भूमि एवं गैरमजरूआ जंगल-झाड़ी भूमि से संबंधित वन अधिकार अधिनियम के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई. इस दौरान ग्रामीणों ने पूर्व की ग्राम सभाओं में उठाई गई समस्याओं और मांगों को भी अधिकारियों के समक्ष रखा.
ग्रामीणों ने कहा कि प्रस्तावित कोलियरी के संचालन से क्षेत्र में पड़ने वाले प्रभाव, रैयती जमीन के रिकॉर्ड में त्रुटियों, सामूहिक एवं व्यक्तिगत वन पट्टा तथा जमीन से जुड़े अन्य मामलों का पहले समाधान किया जाना जरूरी है.
ग्रामीणों ने मांग रखी कि जमीन संबंधी रिकॉर्ड की त्रुटियों में सुधार करने के साथ वर्षों से लंबित सामूहिक एवं व्यक्तिगत वन पट्टा के मामलों का निष्पादन पहले किया जाए. इसके बाद ही कोल परियोजना से संबंधित आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जाए.
परियोजना प्रबंधन ने विकास और सुविधाओं की दी जानकारी
वहीं, परियोजना प्रबंधन के अधिकारियों ने प्रस्तावित कोल परियोजना शुरू होने के बाद क्षेत्र में होने वाले संभावित विकास कार्यों तथा रैयतों को मिलने वाले अधिकारों एवं सुविधाओं के संबंध में ग्रामीणों को जानकारी देने का प्रयास किया.
हालांकि, ग्रामीणों द्वारा जमीन और वन अधिकार से जुड़े मामलों के समाधान की मांग को प्राथमिकता दिए जाने के कारण बैठक में सहमति नहीं बन सकी. ग्रामीणों ने अपनी मांगों को दोहराते हुए पहले लंबित मामलों के निष्पादन की बात कही.
ग्रामीणों के विरोध और विभिन्न मांगों के बीच ग्राम सभा संपन्न हुई. बैठक के बाद परियोजना से जुड़े अधिकारी लौट गए. ग्राम सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी रही.
यह भी पढ़ें: बगोदर में ACB की जांच से मचा हड़कंप, जरमुन्ने पूर्वी पंचायत के पुराने कामों की पड़ताल