बिहार विधानसभा चुनाव में औंधे मुंह गिरी PK की जनसुराज पार्टी, 99% उम्मीदवारों के जमानत हुए जब्त

बड़े-बड़े दावे करने वाले प्रशांत किशोर की राजनीतिक समझ पर उठने लगे सवालिया निशान, पार्टी के कुल वोट शेयर मात्र 2 प्रतिशत के आसपास रहा. 

By : Jeevan Verma
बिहार विधानसभा चुनाव में औंधे मुंह गिरी PK की जनसुराज पार्टी, 99% उम्मीदवारों के जमानत हुए जब्त

न्यूज11 भारत
रांची/डेस्कः-
 बिहार चुनाव में किसी एक पार्टी व चेहरे ने सबसे ज्यादा अगर सुर्खियां बटोरी हैं तो वो है प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी. चुनाव के पहले प्रशांत किशोर के द्वारा बड़े बड़े दावे किए जा रहे थे, पीके ने कहा था कि अगर 125 से 130 सीट अगर जनसुराज की आती है तो इसको मैं अपनी सबसे बड़ी हार मानूंगा. साथ ही पीके ने ये भी कहा था कि नीतिश कुमार की पार्टी जेडीयू अगर 25 से ज्यादा सीटें लाती है तो वो राजनीति छोड़ देंगे और बिहार छोड़ कर चले जाएंगे. पीके सभी मीडिया हाउस में ये लिख कर देते नजर आते थे कि अगली बार जेडीयू की 25 सीट नहीं आएगी. 

उनके सारे दावे हवा-हवाई हो गए, परिणाम आने के बाद पीके के राजनीतिक समझ पर सवालिया निशान खड़े होने लगे. यह इसलिए क्योंकि कोई भी राजनेता किसी भी राजनेता के बारे में ऐसी बातें नहीं करता जैसे पीके बिहार चुनाव के दौरान कर रहे थे. 

प्रशांत किशोर के जनसुराज पार्टी 238 उम्मीदवारों के साथ मैदान में थे इसमें से 236 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है. यानी की 99.16 फीसदी जनसुराज  को उम्मीवारों की जमानत जब्त हो गई.

उलटी पड़ी PK की रणनीति
प्रशांत किशोर ने रणनीति एसी बनाई कि उसने भ्रष्टाचार के मुद्दों पर बीजेपी और जदयू के बड़े चेहरे को टारगेट किया. जिसमे से बीजेपी के सम्राट चौधरी व जदयू के अशोक चौधरी पर भ्रष्टाचार और अपराध के कई सनसनीखेज आरोप  लगाए. तेजस्वी के हमेशा से 9वीं फेल कहने लगे. उनको लगा कि पर्सनल टारगेट करने से सरकार की एंटी इंक्बेंसी को भुना लेंगे. लेकिन दांव बिल्कुल उल्टा पड़ गया और नीतिश कुमार को अपार जनसमर्थन मिला.
लेकिन जिस तरीके से पीके ने बिहार के मुद्दों को उठाया बिहार में पलायन, बेरोजगारी, अपराध, भ्रष्टाचार जैसे विमर्श को जनता के बीच में लाकर खड़ा कर दिया. इसके लिए उनकी तारीफ तो की जानी चाहिए. 

सवालों से घिरे PK 
नतीजे के बाद से अभी तक पीके का कोई रियेक्शन आया नहीं हैशायद उन्हे इसका अंदाजा नहीं था कि भीड़ व भाषण चुनाव नहीं जिता सकता. नतीजों के बाद पीके को तो उन बातों का भी जवाब देना होगा जो उन्होने जेडीयू के इस विधानसभा चुनाव में आने वाली सीटों के बारे में जिक्र किया था. मीडिया में बोले गए बड़े बड़े बयान साक्ष्य के रुप में उपलब्ध रहेंगे. मीडिया हाउस में पेज में लिखकर दी गईहवा-हवाई दावे भी लंबे समय तक उन्हे डराने का काम करेंगे. 

2025 का विधानसभा चुनाव प्रशांत किशोर के लिए एक बड़ी सीख देने वाला चुनाव था. इसमें भीड़, भाषण व शोल मीडिया का शोर का कोई जगह नहीं था, जब तक कि पार्टी का कोई मजबूत संगठन व जमीन से जुड़ा वोट बैंक न हो. 

ये भी पढ़ेंः- 61 सीट पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को बिहार में मिली 6 सीट, कहीं 221 तो कहीं 601 वोट के अंतराल से जीते चुनाव

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