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रांची/डेस्कः- कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अब तक के राजनीतिक करियर में सबसे मुश्किल हालत से गुजर रही है. सांप व छुछंदर जैसा हाल हो गया है न उगलते बन रहा है और न ही निगलते. हिंदु तो पहले से साथ छोड़ते जा रहे हैं वहीं मुस्लिम तुष्टिकरण की भी राजनीति धीरे धीरे खत्म होती दिख रही है. गहन मतदाता पुनरीक्षण ने वैसे ही मुसलमानों में उनकी छवि को गहरा चोट पहुंचाया है, जो कि बांग्लादेश व म्यांमार से आकर पश्चिम बंगाल को सुरक्षित ठिकाना बनाए हुए थे. वहीं दूसरा संकट उन्ही के पार्टी से निलंबित विधायक हुमांयु कबीर, बताया जा रहा है कि अगर कबीर का खेला चला तो ममता का खेला खराब हो सकता है. ममता पिछले 15 सालों ने अल्पसंख्यकों के बदौलत सत्ता पर काबिज है. इस बार अल्पसंख्यक उन्हे सबक सिखाएगा ऐसा कयास लगाया जा रहा है. हुमांयू कबीर राज्य के करीब 90 सीटों पर अपनी निगाह जमाए हुए हैं जो कि सारा अल्पसंख्यक सीट है.
वक्फ पर मुकरीं ममता
ममता बनर्जी पहले कहा था कि बंगाल में वक्फ कानून लागू नहीं होने देंगी. इसको लेकर सड़क से संसद तक उनकी पार्टी टाएमसी ने बवाल मचाया था, मुस्लिम इस बात से खुश थे कि ममता हमलोगों के साथ है लेकिन ममता अपने स्टैंड से अब मुकर गई है. लेकिन भरात सरकार द्वारा बनाए गए पोर्टल पर वक्फ की संपत्ति का ब्योरा अपलोड करने की इजाजत दे दी. बंगाल के मुसलमानों में उनके प्रति नफरत की एक बड़ी वजह बन गई. उन्हे लगने लगा कि ममता भी बीजेपी के जैसा उनके लिए खतरनाक साबित होगी.
SIR से बिगड़ रहा ममता का खेल
बंगाल में एसआईआर की चर्चा शुरु होते ही ममता ने आसमान सिर पर उठा लिया था. तरह तरह के हथकंडे अपनाए, विरोध का सिलसिला अभी भी जारी है. एसआईआर के डर से बांग्लादेशी भाग रहे हैं वहीं घुसपैठियों को सांत्वना दी जा रही है कि उन्हे घबराने की जरूरत नहीं है. मालदा मुर्शिदाबाद जैसे सीमावर्ती इलाकों में इनकी भरमार बताई जाती है.
हुमायूं से पड़ा है ममता का पाला
अल्पसंख्यक वोटरों को खुश करने के लिए ममता ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. इमामों की तनख्वाह तय होना हो या फिर धार्मिक जूलूसों का आयोजन ममता हमेशा से उनके साथ खड़ी रहती है. लेकिन अब स्थिति बदल गई है. ममता की ही पार्टी के एक विधायक ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का राग छेड़ कर ममता को हलकान कर दिया है. ममता ने विधायक के इस रवैये से उन्हे पार्टी से निलंबित कर दिया है. ममता ने विधायक को पार्टी से निलंबित तो कर दिया है लेकिन कितने दिनों तक इसपर कायम रह पाएगी ये भी देखने वाला विषय है. टीएमसी ने हुमायूं कबीर के निलंबन पर सफाई दी है कि उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निलंबित किया गया है.
बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने की ठानी
हुमांयू कबीर ने एलान किया था कि मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाई जाएगी. इसके लिए 6 दिसंबर की तारीख मुकर्रर किया गया था. ममता ने इसे सांप्रदायिक गतिविधि राजनीति करार कर विधायक को पार्टी से सस्पेंड कर दिया. ममता ने विधायक को आरएसएस का मुखौटा बताया. लेकसबा चुनाव के दौरान हुमांयू के बोल बिगड़े थे उसने कहा था ‘हिंदुओं को भागीरथी नदी में डुबो देंगे, क्योंकि मुर्शिदाबाद में 70 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. वे नई पार्टी बनाने का एलान भी कर चुके हैं.
सांप्रदायिक राजनीति की नींव
साल 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक बंगाल की 9.13 करोड़ आबादी में मुस्लिम जनसंख्या 2.47 करोड़ थी. अब मुस्लिम आबादी लगभग 30 प्रतिशत हो जाने का अनुमान लगाया जा रहा है. बाबरी मस्जिद का प्रण ठाने हुमायूं को इन्ही मुस्लिम वोटरों का विश्वास है. बंगाल में बाजपा हिंदुत्व की बात करती है वहीं ममता सेकुलर राजनीति की बात करती है. इस बीच हुमांयू कबीर का बीच में आना साफ जाहिर करता है कि इससे मुस्लिम वोटर बंटेगा और सीधा फायदा भाजपा को होगा. असद्दुद्दिन ओवसी की पार्टी भी बंगाल में संभावना तलाश रही है. ओवैसी पर तो भाजपा के मदद का आरोप भी लग रहा है. ऐसे में अगर अगला साल बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में टीएमसी को झटका लगता है तो ये कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी.
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