न्यूज 11 भारत
रांची/डेस्क: झारखंड राज्य के सबसे पिछड़े जिलों में सुमार चतरा को जल्द ही एक बड़े उद्योग निजी उद्योग की सौगात मिलने वाली है. जिससे न सिर्फ यहां के सैकड़ो हुनरमंद हाथों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा, बल्कि चतरा के शुद्ध देशी गांवों से निकलने वाले धान के चावल का स्वाद अब देश के साथ-साथ विदेश के लोग भी चख सकेंगे. चतरा के दो युवा उद्यमियों की हिम्मत और सकारात्मक सोच के बदौलत जिले को पहला राइस मिल का सौगात मिलने जा रहा है. इस उद्योग के स्थापना के साथ ही अपने खेतो में दिनरात हाड़तोड़ मेहनत करने वाले जिले के तमाम किसानों को भी उनके मेहनत का उचित सम्मान मिलेगा. मेहनत करने वाले किसानों को धान विक्रय के झंझटों से छुटकारा मिलने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से भी समृद्धि मिलेगी. वहीं सरकार को भी राजस्व का बड़ा फायदा होगा. पांच अप्रैल को सांसद कालीचरण सिंह मिल का उदघाटन करेंगे. इस उदघाटन कार्यक्रम में पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता समेत आधा दर्जन विधायक और डीसी रमेश घोलप समेत जिले के कारोबारी, अधिकारी और किसान उपस्थित रहेंगे.
पुणे में लाखों का पैकेज छोड़ इंजीनियर भास्कर नें दोस्त के साथ मिलकर उठाया किसानों के कल्याण का बीड़ा
दरअसल, चतरा से पढ़ लिखकर देश के सबसे अमीर शहरों में सुमार पुणे में लाखों रुपए के पैकेज पर नौकरी करने वाले चतरा के लाल की सकारात्मक सोंच के बदौलत यह सफल हो रहा है. किसानों के राइस मिल का यह सपना चतरा के दो युवा कारोबारियों के संघर्ष और जुनून के कारण पूरा हो पाया है. लगभग 10 करोड़ रुपए की लागत से इस राइस मिल की स्थापना की गई है. इसमें सरकार ने युवा कारोबारियों के हिम्मत और जज्बे को देखते हुए सरकार के नीति के अनुरूप उन्हें प्रोत्साहन हेतू 40 प्रतिशत सब्सिडी दिया है. चतरा के युवा कारोबारी इंजीनियर भास्कर मिश्रा और उनके किसान मित्र उदय दांगी की जोड़ी ने तीन वर्ष पूर्व चतरा में किसानों के समस्याओं को देखते हुए राइस मिल की स्थापना का मन बनाया था. जिसके बाद दोनों नें अपनी तमाम संपत्ति और निजी पूंजी को दाव पर रख इसे पूरा करने का मन में ठान लिया. जिसका नतीजा हैं कि विगत तीन वर्षो के दोनों दोस्तों के कड़े परिश्रम से आज उनका सपना साकार होने जा रहा हैं.
राइस मिल के मालिक युवा उद्यमी इंजीनियर भास्कर बताते हैं कि वह पुणे में इंजीनियरिंग करने के बाद बड़ी कंपनी में नौकरी कर रहे थे. इस दौरान हुए देखे थे कि मुंबई हुआ अन्य दूसरे बड़े शहरों में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर तबके के लोग झारखंड और बिहार के ही होते थे. जिन्हें कड़े परिश्रम के बाद भी उचित अधिकार नहीं मिल पाता था. पूछने पर बताते थे कि किसान होने के बावजूद वे अपने गांव में खेती नहीं कर पाते, क्योंकि उनके द्वारा उत्पादित धान का उचित लाभ उनके बजाय दलाल ले लेते हैं. इसके बाद इंजीनियर भास्कर नें जीवन में कुछ बड़ा करने का संकल्प लिया और लाखों का पैकेज छोड़ अपने शहर चतरा लौट गए. यहां लौटकर उन्होंने अपनी योजना से अपने किसान मित्र उदय दांगी को अवगत कराया. इसके बाद उदय दांगी ने भी उनके संकल्पों को साकार करने में अपनी हामी भर दी. फिर क्या था दोनों ने मिलकर किसानों के कल्याण को लेकर उद्योग स्थापित करने की दिशा में बड़ी उड़ान भरी और आज वह सफलता के मुकाम पर आ खड़े हैं.
चतरा के सैंकड़ो हुनरमंद हाथों को मिलेगा रोजगार
चतरा में राइस मिल का सफल ट्रायल पूरा हो चुका हैं. जिला आपूर्ति पदाधिकारी मनिंदर भगत की उपस्थिति में राइस मिल का ट्रायल हुआ, जिसके बाद चावल उत्पादन के लिए मिल पुरी तरह से तैयार है. इस ट्रायल के साथ ही चतरा जिले में किसानों के बहुप्रतीक्षित मांग रहे राइस मिल का सपना पूरा हो गया. शहर से सटे धमनियां के मिश्रौल में बड़े युनिट का राइस मिल स्थापित किया गया है. मिल में 12 टन प्रति घंटा चावल उत्पादन क्षमता की मशीन लगाई गई है. जहां दो शिफ्ट में प्रत्येक दिन 200 टन चावल उत्पादन करने की क्षमता है. इसके लिए सभी आवश्यक संसाधन व मानव बल तैयार कर लिये गए हैं. मिल संचालकों के अनुसार मिल में जापानी टेक्नोलॉजी का अब तक का सबसे अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित मशीनों और उपकरणों को लगाया गया है. जो देश के सभी राइस मिलों का सबसे अपडेट वर्जन है. संचालकों ने बताया कि इस मिल में तैयार किए गए शुद्ध देशी गांवो के धान के चावल का निर्यात देश के साथ-साथ आधा दर्जन से अधिक विदेशों में भी किया जाएगा. इस मिल में तकनीकी तौर पर प्रशिक्षित संचालकों के साथ-साथ करीब एक हजार मजदूर रोजगार से जुड़ेंगे.
धान क्रय की धांधली से भी किसानों को मिलेगी मुक्ति
उद्यमी उदय वर्मा नें बताया कि चतरा जिला धान उत्पादकता वाले जिलों में अग्रणी जिला है. यहां के किसान बड़े पैमाने पर धान की खेती करते हैं. अब तक जिले के किसान धान बेचने के लिए पुरी तरह से पैक्स या फिर बिचौलियों पर निर्भर रहते थे. लेकिन राइस मिल खुलने के बाद किसानों के पास अपने धान को बेचने या फिर इसके बदले चावल प्राप्त करने का विकल्प मिल गया हैं. उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चतरा जिले में औसतन 36 सौ हेक्टेयर भूमि पर धान का खेती होता है. इस बार चतरा जिले में रिकार्ड एक लाख 10 हजार 753 टन धान का उत्पादन हुआ है. लेकिन ईतने वृहद पैमाने पर धान का उत्पादन होने के बावजूद यहां के किसानों को उसका उचित लाभ नहीं मिल पाया. उन्होंने बताया कि राइस मिल में धान खरीददारी का काम जारी है. किसान यहां अपने धान के एवज में चावल या फिर सरकार के द्वारा धान के लिए निर्धारित समर्थन मूल्य प्राप्त कर सकते हैं. चतरा जिले के किसानों के लिए राइस मिल बहुप्रतीक्षित मांग थी. चतरा जिला किसान बहुल जिला है. ऐसे में यहां राइस मिल की जरूरत थी.