सहमति से बने रिश्ते के टूटने को अपराध नहीं कहा जा सकता, शादी के वादे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला

By : Mansi Kumari
सहमति से बने रिश्ते के टूटने को अपराध नहीं कहा जा सकता, शादी के वादे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
शादी के वादे पर बने रिश्तों को लेकर दर्ज आपराधिक मामलों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और स्पष्ट फैसला सुनाया हैं. कोर्ट ने कहा है कि यदि युवक और युवती के बीच आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बने हों और बाद में शादी किसी कारणवश न हो सके, तो मात्र इसे शादी का झूठा वादा बताकर दंडनीय अपराध नहीं ठहराया जा सकता.

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 का उद्देश्य केवल उन मामलों को दंडित करना है, जहां शुरू से ही धोखा देने या छल करने की मंशा हो. यदि संबंध लंबे समय तक आपसी सहमति से चले हों और दोनों पक्षों में शादी का वास्तविक इरादा रहा हो, तो बाद में रिश्ता टूटने से उसे धोखाधड़ी की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भावनात्मक निराशा या भरोसा टूटने का दर्द आपराधिक अपराध का आधार नहीं बन सकता.

सगाई तक पहुंचा मामला 
यह फैसला न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की खंडपीठ ने नीलेश राम चंदानी की याचिका पर सुनाया. शिकायतकर्ता युवती ने नोएडा के सेक्टर-63 थाने में युवक के खिलाफ धारा 352, 351(2), 69 और दहेज निषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों की मुलाकात जोधपुर में एलएलएम की पढ़ाई के दौरान हुई थी, जहां नजदीकियां बढ़ीं. जून 2023 में दोनों की सगाई हुई और नवंबर 2024 में शादी तय की गई थी. शादी के लिए होटल बुकिंग, कार्ड छपाई और फोटोग्राफर तक फाइनल कर दिए गए थे.

अदालत को यह भी बताया गया कि युवती पिछड़े वर्ग से थी और इस जानकारी के बावजूद युवक का परिवार शादी के लिए सहमत था. युवती के पिता नोएडा में बिजली विभाग में कार्यरत हैं. हालांकि बाद में किसी कारणवश शादी टूट गई, जिसके बाद युवती ने शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी. हाई कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से स्पष्ट है कि शादी का वास्तविक इरादा मौजूद था, इसलिए यह मामला धोखाधड़ी का नहीं बनता. कोर्ट ने बीएनएस की धारा 69 के तहत दर्ज अपराध को रद्द कर दिया, लेकिन मारपीट और धमकी से जुड़े अन्य आरोपों की जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं. साथ ही पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक भी लगाई गई हैं. 

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