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रांची/डेस्क: आप जब भी ट्रेन सफर के लिए टिकट बुक कराते हैं, चाहे वह टिकट काउंटर से कराएं या फिर ऑनलाइन, आपको एक पीएनआर नम्बर मिलता है. PNR वह नम्बर होता है जिसमें आपके किसी खास सफर का सारा विवरण होता है. यह पीएनआर आपने अभी तक 2, 4, 6 या फिर 8 अंक से शुरू होते देखा होगा, लेकिन रेलवे पीएनआर नम्बर के शुरुआती नम्बरों को बदलने जा रहा है. पायलट प्रोजेक्ट के तहत देश की 1230 ट्रेनों से इसकी शुरुआत हो रही है, दिसंबर तक देश के सभी जोन के पीएनआर नम्बरों में बदलाव हो जाएगा. . दिसंबर से देश की सभी ट्रेनों के पीएनआर 1, 3, 5 या 7 अंकों से शुरू होंगे
1986 में रेलवे रिजर्वेशन कंप्यूटरीकृत हुआ था. तब से वर्तमान नम्बरों वाली सीरीज ही चल रही है. इन नम्बरों के उसी नम्बर से शुरू होने के पीछे भी वजह है. ये नम्बर डेटाबेस सेंटर दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई से जुड़े हैं. दिल्ली डेटाबेस सेंटर का पीएनआर 2, कोलकाता का 6, मुंबई का 8 और चेन्नई का 4 है. पैसेंजर नेम रिकॉर्ड (पीएनआर) में 10 अंक होते हैं. इसके शुरुआती तीन अंकों से ट्रेन के जोन और क्षेत्र की पहचान है.
रेलवे क्यों कर रहा है यह बदलाव?
रेलवे पीएनआर को लेकर कोई बदलाव नहीं कर रहा है, बल्कि वह अपने सिस्टम को अपग्रेड कर रहा है. रेलवे ने दशकों पुराने पीआरएस को नए नेक्स्ट जेनरेशन सिस्टम में अपग्रेड कर लिया है. जिससे रेल आरक्षण कार्य की गति काफी बढ़ गई है. काउंटर पर टिकट बनाते समय अप्लीकेशन में कोई गलती होने पर उसमें संशोधन करने, एक ही बार में ट्रेनों में सीटों की उपलब्धता, किराया, बर्थ की पोजिशन जैसी जानकारी उपलब्ध हो जाती है. पहले यह काम इतने सटीक तरीके से नहीं होता था. लेकि नए अपग्रेड सिस्टम में पुरानी शृंखला के नंबर बाधा बन रहे हैं, इसलिए रेलवे ने यह बदलाव किया है. रेलवे के अनुसार, बदले हुए नम्बरों 1,3 5, 7 से यह काम काफी सटीकता के साथ होता है.
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