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रांची/डेस्क: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को बार-बार सुप्रीम कोर्ट पहुंच रहीं याचिकाओं को एक बार फिर झटका लगा है. चुनाव आयोग में चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों के बाद देश भर में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग और इसी मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ताओं को फिर मायूस होना पड़ा है. याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीईसी के निलंबन की मांग को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मीडिया में चल रही खबरों के आधार पर कोर्ट फैसला नहीं दे सकती. लेकिन कोर्ट ने चुनाव आयोग से वर्तमान में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को लेकर जवाब जरूर मांगा हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर केंद्र से भी जवाब मांगा है.
याचिका में कहा गया था कि सीईसी ज्ञानेश कुमार संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का एकतरफा प्रयोग कर रहे हैं. यहां तक की वह चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को भी नजर अंदाज कर रहे हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़ी याचिका पर CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची व वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई हुई. जिसमें पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि वह मीडिया में चल रही खबरों के आधार पर फैसला नहीं सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त से क्या जवाब मांगा?
- फैसले सामूहिक लिए गए या अकेले लिए गए?
- Form-6 और वोटर लिस्ट में बदलाव कैसे हुआ?
- SIR के दौरान 30 राज्यों में 13 करोड़ नाम हटाने का फैसला क्या सामूहिक था?
- ECINet और ERONet डेटाबेस में बदलाव किसकी मंजूरी से हुआ?
- सुप्रीम कोर्ट ने तथ्यों के साथ रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा.
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