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रांची/डेस्क: इस समय देश के अधिकांश राज्यों में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया चल रही है. पुनरीक्षण का कार्य चुनाव आयोग काफी बारीकी के साथ कर रहा है. छोटी सी भी चूक होने पर वह खारिज कर दे रहा है और नोटिस देकर सम्बंधित फॉर्म भरने को भी कह रहा है. SIR की प्रक्रिया के बीच एक बड़ा ही रोचक मामला सामने आया है. यह मामला जिनसे सम्बंधित हैं, वह कोई छोटे-मोटे व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि देश के जाने-माने और भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक हैं. भारत रत्न से सम्मानित प्रोफेसर CNR राव को अब अपनी पहचान साबित करने के लिए चुनाव आयोग के सामने पेश होना होगा.
क्या है मामला?
मामला कर्नाटक में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा हुआ है. इस प्रक्रिया के दौरान नाम की स्पेलिंग में अंतर पाए जाने पर सीएन राव को नोटिस जारी कर उन्हें अपनी बात स्पष्ट करने को कहा गया है. मतादाता सूची के पिछले रिकॉर्ड में उनका नाम प्रोफेसर सीएनआर राव (Prof. CNR Rao) दर्ज है. लेकिन नए रिकॉर्ड में उनके नाम में एक अतिरिक्त 'f' जुड़ गया है. यानी उनका नाम नयी मतदाता सूची में 'Proff. CNR Rao' हो गया है. बस, इसी के स्पष्टीकरण के लिए प्रोफेसर राव को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के पास मल्लेश्वरम में होने वाली सुनवाई के लिए बुलाया गया है.
प्रो. सीएन राव का परिचय
बेंगलुरु में जन्मे 92 साल के प्रोफेसर राव विख्यात वैज्ञानिक हैं. वह सॉलिड-स्टेट और स्ट्रक्चरल केमिस्ट्री में काम के लिए जाने जाते हैं. उनकी ख्याति इसी से समझी जा सकती है कि कि दुनिया के 88 विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिल चुकी है. विज्ञान से जुड़ी 58 किताबें भी उन्होंने लिखी हैं. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 2014 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाना है. वह देश के तीसरे वैज्ञानिक हैं जिन्हें भारत रत्न मिला है. सीएन राव पद्मश्री और पद्म विभूषण से भी सम्मानित हो चुके हैं.
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