जानें कहां बनाया जाता है लाल किले पर फहराया जाने वाला तिरंगा, 126 कर्मचारी साल भर बनाते हैं राष्ट्रीय ध्वज

By : Vaibhaw Vikram
जानें कहां बनाया जाता है लाल किले पर फहराया जाने वाला तिरंगा, 126 कर्मचारी साल भर बनाते हैं राष्ट्रीय ध्वज

न्यूज11 भारत

रांची/डेस्क:
कल 26 जनवरी है. कल के दिन को पूरा देश गणतंत्र दिवस (Republic Day) के रूप में मनाता है. वहीं देश के प्रधानमंत्री इस दिन दिल्ली स्थित लाल किले पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हैं. इस बात से हम सभी अवगत हैं. मगर क्या आप यह जानते हैं कि फहराने वाला देश का राष्ट्रीय ध्वज कहां बनाया जाता है और कितने कर्मचारी मिलकर इस तिरंगे को बनाते हैं.यदि आप नहीं जानते हैं तो, घबराने वाली बात नहीं है हम आपको इस बात से पूरी तरह अवगत करा देंगे. तो चलिए जानते हैं कहां बनाया जाता है, हमारा प्यारा, आपका प्यारा और पूरे देश की आन-बान-शान हम सबकी जान तिरंगा ध्वज.

कर्नाटक में बनाया जाता है तिरंगा

भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा कर्नाटक के हुबली में बनाया जाता है. इस तिरंगे को खादी के कपड़े से तैयार किया जाता है. जिस खादी के कपड़े से तिरंगे को तैयार किया जाता है वह कपड़ा बालाकोट के एक गांव के मजदूर बनाते हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें, लाल किले में फहराया जाने वाला तिरंगा कर्नाटक के हुबली में स्थित कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ (KKGSSF) में बनाया जाता है. भारत सरकार तिरंगा बनाने के लिए केवल इन्हें ही लाइसेंस प्रदान करती है. वहीं इस ध्वज को बनाने के लिए 126 कर्मचारी साल भर तिरंगा बनाते हैं और इनमें ज्यातादि महिलाएं काम करती हैं. वहीं, लाल किले पर फहराए जाने वाले तिरंगे का ऑर्डर करीब 2 महीने पहले आता है.

फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के तहत होता है तिरंगा तैयार

लाल किले पर फहराया जाने वाला तिरंगा 6 चरण की प्रक्रिया को पूरी करने के बाद तैयार की जाती है. जिसमें सबसे पहले कपड़े की हाथ से कटाई की जाती है. जिसके बाद बुनाई की जाती है. तीसरे चरण में कपड़े की रंगाई की जाती है. वहीं चौथे और पांचवें चरण में चक्र की छपाई, सिलाई और बंधाई की जाती है. लाल किले में फहराया जाने वाले तिरंगे की कीमत 6500 रुपए है. वहीं हाई मास्ट पर 21x14 फीट के झंडे लगाए जाते हैं और इनकी कीमत 17,800 रुपए होती है. मंत्रियों की कारों में लगने वाला झंडा 300 रुपए और टेबल पर लगाने वाला तिरंगा 200 रुपए में मिलता है. वहीं नियम के अनुसार, राष्ट्र ध्वज का आकार 3:2 यानी आयताकार होना चाहिए. वहीं तिरंगे को तैयार करने के समय बीआईएस की गाइडलाइन का सख्ती से पालन किया जाता है. क्योंकि राष्ट्र ध्वज की रंगाई, आकार, धागे की मात्रा और सूत की मजबूती में किसी तरह की गलती की गुंजाइश नहीं होती है.

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