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रांची/डेस्क: यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज, हज़ारीबाग (विनोबा भावे विश्वविद्यालय से संबद्ध) में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर लक्ष्मी सिंह का सहायक प्राध्यापक (असिस्टेंट प्रोफेसर) की नियुक्ति के मामले में Jharkhand High Court ने नोटिस जारी किया है. न्यायधीश दीपक रौशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने लक्ष्मी सिंह को नोटिस जारी कर दो सप्ताह (14 दिन) के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
एक नजर मे पूरा मामला?
हज़ारीबाग निवासी याचिकाकर्ता सुशील कुमार द्वारा दायर रिट याचिका में यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज की सहायक प्रोफेसर कुमारी लक्ष्मी सिंह की नियुक्ति को अवैध बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की गई है. याचिका में आरोप है कि प्राध्यापक ने नौकरी पाने के लिए जिन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है, वे पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत हैं.
याचिका के मुताबिक, कुमारी लक्ष्मी सिंह ने औरंगाबाद लॉ कॉलेज (मगध विश्वविद्यालय) से अपनी LL.B. की डिग्री होना दर्शाया है. लेकिन, जांच में सामने आया है कि उक्त कॉलेज को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा केवल 1993-1994 के लिए ही मान्यता मिली थी. इसके अलावा, दस्तावेजों में कई गंभीर खामियां उजागर की गई हैं: प्रथम वर्ष के प्रवेश पत्र (Admit Card) और मार्कशीट में परीक्षा केंद्र के कोड अलग-अलग दर्ज हैं.
प्रवेश पत्र के अनुसार पार्ट-II की परीक्षा 1996 में और पार्ट-III की 1998 में हुई, लेकिन पार्ट-III की मार्कशीट की तारीख कॉलेज लीविंग सर्टिफिकेट (CLC) जारी होने के बाद की है, जो इसे अत्यधिक संदेहास्पद बनाता है. आरोपी प्राध्यापक पर एडवोकेट एक्ट के उल्लंघन का भी आरोप है, क्योंकि झारखंड स्टेट बार काउंसिल में निबंधित होने के बावजूद वे व्यावसायिक गतिविधियों (बिल्डर/डेवलपर) में शामिल थीं.
विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
न्यायालय के समक्ष यह बात भी रखी गई कि इस कथित फर्जीवाड़े की शिकायत के बाद विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU) के कुलपति ने 30 मई 2023 और फिर 12 मार्च 2025 को जांच समितियां गठित की थीं. लेकिन हैरानी की बात यह है कि सालों बीत जाने के बाद भी जांच समिति ने आज तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है.
याचिकाकर्ता ने बताया कि दिसंबर 2023 में झारखंड के राज्यपाल ने भी वोकेशनल कोर्स में अवैध रूप से नियुक्त शिक्षकों को तत्काल हटाने का सख्त निर्देश दिया था, लेकिन विश्वविद्यालय ने उस आदेश को भी दरकिनार कर दिया. आरटीआई (RTI) और प्रथम अपील दायर करने के बावजूद विश्वविद्यालय ने याचिकाकर्ता को कोई जानकारी नहीं दी.
याचिकाकर्ता की दलीलों और संलग्न दस्तावेजों को गंभीरता से लेते हुए, झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रतिवादियों उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति (VC), कुलसचिव और आरोपी सहायक प्राध्यापक कुमारी लक्ष्मी सिंह को मामले में अपना पक्ष रखने और 2 सप्ताह के भीतर हलफनामा (जवाब) दायर करने का निर्देश दिया है.