प्रमोद कुमार/न्यूज़11 भारत
बरवाडीह/डेस्क: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) के निर्देशानुसार तथा माननीय शेष नाथ सिंह, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, लातेहार के मार्गदर्शन में बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 विषय पर प्रखंड के संत सोल्जर पब्लिक स्कूल में जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य सुनील कुमार सिंह ने की. सेमिनार की शुरुआत में डॉ. मुरारी झा, पीएलवी (पैरा लीगल वॉलंटियर), ने छात्राओं को संबोधित करते हुए बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की विस्तृत जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि यह कानून 1 नवंबर 2007 से पूरे देश में प्रभावी है और इसका उद्देश्य बाल विवाह को पूरी तरह प्रतिबंधित करना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह पूर्णतः अवैध एवं दंडनीय अपराध है. यह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है. बाल विवाह में शामिल होने, सहयोग करने या इसे बढ़ावा देने वालों को भी दो वर्ष तक की सजा तथा एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
इस अवसर में अन्य वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. कम उम्र में विवाह से शिक्षा बाधित होती है, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं और विशेष रूप से बालिकाओं का भविष्य प्रभावित होता है.कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा, शिक्षा के महत्व और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया. वक्ताओं ने जोर दिया कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को समाप्त करने के लिए समाज, परिवार, विद्यालय और प्रशासन की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है.
सेमिनार का मुख्य उद्देश्य छात्राओं में कानूनी जागरूकता बढ़ाना, उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग करना तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सशक्त बनाना रहाइस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्राएं एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे.
यह भी पढ़ें: जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने मतगणना केंद्र का किया निरीक्षण