प्रेम कुमार सिंह/न्यूज 11 भारत
गुमला/डेस्क: भरनो मौजा स्थित डाईर जतरा टांड़ की जमीन का दाखिल-खारिज कर रसीद काटे जाने के विरोध में मंगलवार को 21 पड़हा भरनो के राजा मुकेश उरांव की अगुवाई में सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रखंड सह अंचल कार्यालय भरनो का घेराव किया. आक्रोशित ग्रामीणों ने करीब एक घंटे तक मुख्य गेट बंद कर विरोध प्रदर्शन किया तथा एलआरडीसी गुमला, अंचलाधिकारी भरनो, अंचल निरीक्षक एवं संबंधित राजस्व कर्मचारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शन के दौरान प्रखंड कार्यालय में बैठक में भाग लेने पहुंचे पंचायती राज पदाधिकारी शिशिर कुमार को भी ग्रामीणों ने कार्यालय परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया. बाद में उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली.
ग्रामीणों ने बताया कि भरनो मौजा के खाता संख्या 414 तथा प्लॉट संख्या 3782 और 3794 की कुल 4 एकड़ 54 डिसमिल भूमि जो वर्षों से डाईर जतरा टांड़ के रूप में उपयोग होती रही है. ये जमीन रातु महाराजा का है, इस स्थल पर ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक डाईर जतरा, सरना पूजा, खेलकूद प्रतियोगिताएं तथा अन्य सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन उनकी आस्था और परंपरा से जुड़ी हुई है तथा इसे बचाने के लिए उन्होंने पूर्व में कई प्रयास किए हैं.
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अतीत में कई बार बिचौलियों एवं जमीन कारोबारियों द्वारा उक्त भूमि पर कब्जा करने तथा दाखिल-खारिज कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन अंचल कार्यालय द्वारा उन आवेदनों को निरस्त कर दिया गया था. इसके बावजूद भरनो निवासी अजीत प्रसाद केशरी एवं रत्नेश प्रसाद केशरी पिता रामधन साहू के द्वारा उक्त जमीन का दाखिल-खारिज कैसे करवा लिया गया, यह जांच का विषय है.
ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में एलआरडीसी गुमला एवं भरनो अंचल के कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है. उनका आरोप है कि मोटी रकम लेकर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी की गई है. ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से कई किसानों के काबिल लगान से संबंधित मामले लंबित पड़े हुए हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है. वहीं डाईर जतरा जैसे सार्वजनिक और धार्मिक महत्व के स्थल की जमीन पर रसीद काटने का आदेश बेहद तेजी से जारी कर दिया गया, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है. जबकि पूर्व में कई बार ग्रामीणों को उक्त जमीन को लेकर अंचल कार्यालय में आवेदन दिया जा चुका है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि डाईर जतरा टांड़ की जमीन का दाखिल-खारिज एवं रसीद रद्द नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे.
उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं बल्कि आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है. ग्रामीणों की बात सुनने के बाद पंचायती राज पदाधिकारी शिशिर कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित जतरा स्थल, सरना, मसना एवं अन्य धार्मिक स्थल पेसा कानून की भावना के अंतर्गत विशेष महत्व रखते हैं. उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी स्थिति में क्षेत्र की शांति व्यवस्था भंग नहीं होने दी जाएगी तथा ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए उचित स्तर पर मामले को रखा जाएगा. उन्होंने ग्रामीणों से जिला प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखने का आग्रह किया.
प्रदर्शन के अंत में ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी के नाम एक ज्ञापन सौंपकर डाईर जतरा टांड़ की जमीन के दाखिल-खारिज और जारी रसीद को तत्काल निरस्त करने की मांग की. साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, 21 पड़हा के प्रतिनिधि एवं सामाजिक अगुवा उपस्थित रहे.
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