न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में मृत महिला के परिवार को बड़ी राहत देते हुए मुआवजे की राशि करीब चार गुना बढ़ा दी है. कोर्ट ने 1.45 लाख रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 5.60 लाख रुपये कर दिया. साथ ही बीमा कंपनी को इस राशि पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का निर्देश दिया है. गुरुवार को यह फैसला मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक की एकलपीठ ने सुनाया.
मामला वर्ष 2008 के एक सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें कोश्मी देवी की मौत हो गई थी. बीमा कंपनी ने मुआवजा देने के आदेश को चुनौती देते हुए वाहन के नंबर में विसंगति का हवाला दिया था. एफआईआर में वाहन का नंबर HR-13A-3349, जबकि चार्जशीट में JH-13A-3349 दर्ज था. हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस तकनीकी विसंगति के आधार पर बीमा कंपनी की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती. गवाहों के बयान और चार्जशीट से दुर्घटना में संबंधित वाहन की संलिप्तता पर्याप्त रूप से साबित होती है.
मृतका की उम्र पर भी अहम फैसला
ट्रिब्यूनल ने मृतका की उम्र 70 वर्ष मानकर मुआवजे की गणना की थी. हाईकोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसकी उम्र 55 वर्ष मानी. कोर्ट ने मृतका के बेटे के बयान को महत्वपूर्ण माना, जिसमें उसने हादसे के समय अपनी मां की उम्र करीब 55 वर्ष बताई थी. मृतका की मासिक आय 3 हजार रुपये मानते हुए कोर्ट ने उसमें 10 प्रतिशत भविष्य की आय का लाभ जोड़ा और 11 का मल्टीप्लायर लगाया. इसके आधार पर मुआवजे की पुनर्गणना की गई.
पांच बेटों को भी मिलेगा कंसोर्टियम का लाभ
हाईकोर्ट ने मृतका के पांच बेटों को 40-40 हजार रुपये के हिसाब से कुल 2 लाख रुपये Loss of Filial Consortium के तहत दिए. इसके अलावा Loss of Estate और अंतिम संस्कार के लिए 15-15 हजार रुपये निर्धारित किए गए. इस तरह कुल मुआवजा 5,56,700 रुपये आया, जिसे कोर्ट ने राउंड ऑफ कर 5.60 लाख रुपये कर दिया.
कोर्ट ने बीमा कंपनी को बढ़ी हुई राशि छह सप्ताह के भीतर ट्रिब्यूनल में जमा करने का निर्देश दिया है. पहले से भुगतान की गई राशि का समायोजन किया जाएगा. साथ ही बीमा कंपनी को राशि पहले चुकाने और बाद में वाहन मालिक से वसूलने की अनुमति बरकरार रखी गई है.
यह भी पढ़ें- पैनम कोल माइंस में अवैध खनन मामले की ACB करेगी प्रारंभिक जांच, हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट