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रांची/डेस्क: झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव की मतगणना पूरी होने के बाद सामने आई तस्वीर ने कानूनी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. वरिष्ठ अधिवक्ता महेश तिवारी ने चुनाव में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए मतों के आधार पर जीत हासिल कर ली थी और वे निर्वाचित होने की स्थिति में पहुंच चुके थे. हालांकि, परिणाम घोषित होने से ठीक पहले घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया. अंतिम आंकड़ों में पर्याप्त मत मिलने के बावजूद उनके निर्वाचन पर रोक लगा दी गई, जिससे उनकी जीत अधर में लटक गई.
कानूनी अड़चन बनी बाधा
इस निर्णय के पीछे एक पुराना आपराधिक मामला मुख्य कारण बना. हाल ही में एक मामले में अदालत द्वारा महेश तिवारी को दोषी ठहराया गया था, जिसके चलते बार काउंसिल के नियम उनके खिलाफ लागू हो गए.
दुर्व्यवहार के मामले में दोषसिद्धि का असर
महेश तिवारी पर एक महिला वकील के साथ मारपीट और अनुचित व्यवहार करने का आरोप था. मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने उन्हें दोषी पाया. बार काउंसिल के नियम स्पष्ट करते हैं कि किसी गंभीर आपराधिक मामले में दोषसिद्ध उम्मीदवार चुनाव लड़ने या पद ग्रहण करने के योग्य नहीं होता. इसी आधार पर चुनाव समिति ने सख्त रुख अपनाते हुए महेश तिवारी को अयोग्य घोषित कर दिया. परिणामस्वरूप, उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी प्रयाग महतो को विजेता घोषित किया गया. प्रयाग महतो के विजेता घोषित होने के बाद उनके समर्थकों में उत्साह का माहौल है.
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