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रांची/हजारीबाग/डेस्क: हजारीबाग शहर में ट्रैफिक प्रबंधन की खराब स्थिति और अदालत के आदेशों की अनदेखी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एम एस सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए हजारीबाग नगर निगम के नगर आयुक्त ओम प्रकाश गुप्ता को अवमानना (Contempt) का नोटिस जारी किया है.
मामला हजारीबाग शहर में ट्रैफिक सिस्टम को दुरुस्त करने से जुड़ा है, जिसमें पहले भी हाईकोर्ट द्वारा कई निर्देश दिए जा चुके हैं. अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि शहर में जहां-जहां ट्रैफिक की समस्या है, विशेषकर टोटो समेत अन्य वाहनों के संचालन से जुड़ी समस्याओं की जांच कर व्यवस्था को सुधारा जाए. हालांकि, बार-बार निर्देश के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी सुधार नहीं होने की बात कोर्ट के समक्ष रखी गई.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा की ओर से यह भी बताया गया कि शहर के प्रमुख चौराहों पर अब तक ट्रैफिक सिग्नल नहीं लगाए गए हैं. फुटपाथों से अतिक्रमण नहीं हटाया गया है और न ही हॉकिंग जोन विकसित किए गए हैं. पार्किंग व्यवस्था को लेकर किए गए दावों पर भी सवाल उठाए गए और संबंधित साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए.
मामले में हलफनामा दाखिल करने को लेकर भी अदालत ने नाराजगी जताई. हाईकोर्ट ने पूर्व में स्पष्ट निर्देश दिया था कि नगर आयुक्त स्वयं अपने नाम से शपथपत्र दाखिल करेंगे. इसके बावजूद इस बार भी उनकी ओर से कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) द्वारा हलफनामा दाखिल किया गया. अदालत ने इसे अपने आदेश की अवहेलना माना.
सुनवाई के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन परियोजना के बजट का मुद्दा भी उठा. अदालत को बताया गया कि पहले इस परियोजना के लिए लगभग 39 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे बाद में घटाकर करीब 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है. इस बदलाव को भी कोर्ट के समक्ष रखा गया. अदालत ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे 17 जुलाई से पहले स्वयं उपस्थित होकर अपना जवाब दाखिल करें. साथ ही एक सप्लीमेंट्री एफिडेविट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है.
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