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रांची/डेस्क: भारत निर्वाचन आयोग ने मतदान के बाद फॉर्म 17A (मतदाता रजिस्टर) और अन्य चुनावी दस्तावेजों की जांच के लिए समेकित निर्देश जारी किए हैं. इसका उद्देश्य पारदर्शिता को मजबूत करना, मतदान केंद्रों पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का पता लगाना और आवश्यकता पड़ने पर पुनर्मतदान (Repoll) की सिफारिश करना है.
इसी क्रम में, 24 अप्रैल, 2026 को पश्चिम बंगाल (चरण-I) के उन सभी 152 विधानसभा क्षेत्रों (AC) में दस्तावेजों की जांच सुचारू रूप से की गई, जहां मतदान हुआ था. यह प्रक्रिया रिटर्निंग अधिकारियों (RO) द्वारा सामान्य पर्यवेक्षकों (GO) और 600 से अधिक उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संपन्न हुई.
पश्चिम बंगाल आम चुनाव के पहले चरण में, सभी 1,478 उम्मीदवारों को जांच की तिथि, समय और स्थान के बारे में सूचित किया गया था ताकि वे इस प्रक्रिया में भाग ले सकें. जांच के बाद, 23 अप्रैल 2026 को मतदान वाले 44,376 मतदान केंद्रों में से किसी भी केंद्र पर पुनर्मतदान की सिफारिश नहीं की गई है.
इसी प्रकार, तमिलनाडु के सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों में 24 अप्रैल, 2026 को रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की जांच सफलतापूर्वक की गई. इस दौरान सामान्य पर्यवेक्षक और 1,825 उम्मीदवार या उनके प्रतिनिधि उपस्थित थे.
तमिलनाडु आम चुनाव में, सभी 4,023 उम्मीदवारों को जांच की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए समय और स्थान की अग्रिम सूचना दी गई थी. जांच के पश्चात, 23 अप्रैल 2026 को मतदान वाले 75,064 मतदान केंद्रों में से कहीं भी पुनर्मतदान की आवश्यकता नहीं पाई गई.
दोनों राज्यों में इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई और जांच के बाद, फॉर्म 17A एवं संबंधित सामग्रियों को रिटर्निंग ऑफिसर की सील के साथ फिर से सील कर दिया गया.
ईवीएम-वीवीपीएटी (EVM-VVPATs) को सुरक्षित रूप से 'स्ट्रांग रूम' में रखा गया है, जिन्हें 23 अप्रैल, 2026 को मतदान समाप्त होने के बाद सामान्य पर्यवेक्षकों और उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सील कर दिया गया था.
ईवीएम स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जिसमें डबल-लॉक सिस्टम, चौबीसों घंटे दो-स्तरीय सुरक्षा घेरा और स्ट्रांग रूम के दरवाजों/गलियारों की सीसीटीवी (CCTV) कवरेज शामिल है.
रिटर्निंग अधिकारियों (RO) को दिन में दो बार स्ट्रांग रूम का दौरा करने और व्यवस्थाओं की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं, जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) मुख्यालय स्थित स्ट्रांग रूम का प्रतिदिन एक बार और मुख्यालय से बाहर स्थित स्ट्रांग रूम का हर 3-4 दिन में एक बार दौरा करेंगे.
उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को भी स्ट्रांग रूम पर नजर रखने के लिए स्ट्रांग रूम भवन परिसर में शिविर (कैंप) लगाने की अनुमति दी गई है.
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