वीरेन्द्र शर्मा/न्यूज़ 11 भारत
बरही/डेस्क: चौपारण प्रखंड के करमा गांव में भूदान यज्ञ समिति से मिली जमीन पर दबंगों द्वारा कब्जा करने के आरोप को लेकर मंगलवार को सियासत गरमा गई. पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने चौपारण प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया.
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने "राजदेव यादव गरीबों का शोषण करना बंद करो" और "सांसद-विधायक के संरक्षण में जमीन हड़पना बंद करो" जैसे नारे लगाते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई.
प्रदर्शन के बाद पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला के नेतृत्व में ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी संजय यादव को एक ज्ञापन सौंपा.
क्या है पूरा मामला?
ज्ञापन देने वाले करमा गांव निवासी संतोष भुईयाँ ने बताया कि उनके दादा स्व. काली भुईयाँ को वर्ष 1955 में भूदान यज्ञ समिति, हजारीबाग द्वारा मौजा करमा, थाना नंबर 51, खाता नंबर 59, प्लॉट नंबर 12 में तीन एकड़ भूमि दी गई थी. जिसकी चौहद्दी उत्तर में बिनोवा जी टांड़, दक्षिण में गन्दौरी भुईयाँ, पूरब में रास्ता और पश्चिम में जंगल-झाड़ी है.
संतोष भुईयाँ का आरोप है कि उनके दादा और पिता चेतलाल भुईयाँ की कम उम्र में मृत्यु हो जाने के बाद वह नाबालिग थे. इसी का फायदा उठाकर गांव के ही राजदेव यादव, शिबा यादव, खेलावन यादव, बाजो यादव, शशि यादव, अभिजीत कुमार यादव उर्फ ललू यादव तथा महेंद्र यादव ने उक्त भूदान की जमीन पर मकान बनाकर कब्जा कर लिया. विरोध करने पर धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है.
पीड़ित ने खुद को अनुसूचित जाति के गरीब परिवार से बताते हुए उपायुक्त हजारीबाग से मामले की निष्पक्ष जांच कर भूदान की जमीन को कब्जा मुक्त कराकर दखल दिलाने की मांग की है.
वहीं इस मामले को लेकर बरही विधानसभा की राजनीति तेज हो गई है. बताया जा रहा है कि जिन पर कब्जे का आरोप लग रहा है, उनमें शामिल राजदेव यादव वर्तमान विधायक के प्रतिनिधि हैं, जो अक्सर पूर्व विधायक के विरोध में प्रेस वार्ता करते रहे हैं. इस कारण इस जमीन विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है.
फिलहाल अंचलाधिकारी ने ग्रामीणों को जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है.