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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने सिविल इंजीनियरिंग की AMICE योग्यता को AMIE के बराबर मानने की मांग को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि किसी शैक्षणिक योग्यता को दूसरी योग्यता के बराबर घोषित करना तकनीकी और अकादमिक विषय है. यह फैसला संबंधित राज्य, भर्ती प्राधिकरण या विशेषज्ञ अकादमिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में आता है. कोर्ट खुद किसी डिग्री की समकक्षता तय नहीं कर सकता. न्यायाधीश दीपक रोशन की एकलपीठ ने राजीव कुमार, कांति कुमार और सुजीत कुमार सिंह की ओर से दाखिल तीनों याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए यह फैसला सुनाया.
क्या था पूरा मामला
याचिकाकर्ता झारखंड सरकार के रोड कंस्ट्रक्शन विभाग में जूनियर इंजीनियर हैं. उन्होंने Institution of Civil Engineers (India), Ludhiana से AMICE योग्यता हासिल की थी. उनका कहना था कि AMICE को Institute of Engineers (India) की AMIE योग्यता के बराबर माना जाना चाहिए. याचिकाकर्ताओं ने 1 सितंबर 2009 के सरकारी प्रस्ताव के तहत असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर प्रमोशन के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत AMIE या समकक्ष योग्यता वाले कोटे में उन्हें भी शामिल करने की मांग की थी.
हाईकोर्ट ने क्यों नहीं माना AMICE को AMIE के बराबर
कोर्ट ने पाया कि Institution of Civil Engineers (India), Ludhiana को सरकार की ओर से केवल 2007-08 के अकादमिक सत्र के लिए मान्यता मिली थी. इसके बाद इसकी मान्यता का विस्तार नहीं किया गया. AICTE की ओर से दाखिल हलफनामे में भी यही स्थिति बताई गई थी. अदालत ने कहा कि जब संबंधित योग्यता की मान्यता ही आगे जारी नहीं रही, तो उसके AMIE के बराबर होने का सवाल भी नहीं उठता. साथ ही, रिकॉर्ड में ऐसा कोई आदेश, अधिसूचना या सक्षम प्राधिकारी का दस्तावेज नहीं है, जिसमें AMICE को AMIE के समकक्ष घोषित किया गया हो.
कोर्ट खुद तय नहीं कर सकता डिग्री की समानता
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि शैक्षणिक योग्यता की समकक्षता एक तकनीकी मामला है. अदालत अपने स्तर पर किसी दूसरी डिग्री को निर्धारित योग्यता के बराबर घोषित नहीं कर सकती. इसके लिए सक्षम अकादमिक या संबंधित प्राधिकरण का स्पष्ट आदेश या प्रस्ताव जरूरी है. कोर्ट ने यह भी कहा कि बिहार सरकार की ओर से AMICE को लेकर लिया गया कोई फैसला झारखंड पर बाध्यकारी नहीं है. किसी दूसरे राज्य की अपनी सेवा व्यवस्था से जुड़ी नीति को झारखंड की सरकारी सेवाओं पर लागू नहीं किया जा सकता.
2025 के नियम भी याचिकाकर्ताओं के खिलाफ
अदालत ने झारखंड इंजीनियरिंग सर्विस, अपॉइंटमेंट एंड अदर सर्विस कंडीशंस रूल्स, 2025 का भी उल्लेख किया. कोर्ट के मुताबिक इन नियमों में असिस्टेंट इंजीनियर पद पर प्रमोशन के लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से इंजीनियरिंग डिग्री या AMIE की योग्यता का प्रावधान है. हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के लिए प्रमोशन का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है. 1 सितंबर 2009 के प्रस्ताव के तहत जूनियर इंजीनियरों के प्रमोशन के लिए 28 प्रतिशत का सामान्य कोटा भी है. याचिकाकर्ता उस कोटे के तहत पात्रता के अनुसार विचार के लिए बने रहेंगे.
छह सप्ताह में DPC कराने का निर्देश
अदालत ने बताया कि 5 मई 2026 के अंतरिम आदेश के कारण विभागीय प्रोन्नति समिति (DPC) की बैठक नहीं हो सकी थी. सरकार ने 6 जुलाई 2026 के सर्कुलर के जरिए DPC की बैठक साल में एक बार जुलाई महीने में कराने का प्रावधान किया था. इसे देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर DPC की बैठक बुलाने और सभी पात्र कर्मचारियों को प्रमोशन देने का निर्देश दिया. साथ ही 5 मई 2026 का अंतरिम आदेश समाप्त कर दिया गया. हाईकोर्ट ने तीनों रिट याचिकाओं को मेरिट नहीं होने के कारण खारिज कर दिया और लंबित इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन को भी बंद कर दिया.
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