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रांची/डेस्क: झारखंड के ऑडिटर जनरल ने राज्य की स्वायत्त संस्थाओं को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया हैं. रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा संचालित कई स्वायत्त इकाइयों ने वर्षों से ऑडिट ही नहीं करवाया. इस लापरवाही पर अब सख्त रुख अपनाते हुए सभी संस्थाओं के लिए ऑडिट कराना और रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य कर दिया गया हैं.
जानकारी के मुताबिक, रिनपास (RINPAS) में आज तक एक बार भी ऑडिट नहीं कराया गया है, जबकि झारखंड हाउसिंग बोर्ड ने पिछले 23 वर्षों से ऑडिट नहीं करवाया. इससे इन संस्थाओं की वित्तीय पारदर्शिता और संचालन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. इसी मुद्दे पर आज एजी ऑफिस में पांच महत्वपूर्ण स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक संस्थानों को बुलाकर विस्तृत ब्रीफिंग दी गई. इनमें शामिल हैं:
- स्टेट हाईवे अथॉरिटी ऑफ झारखंड (SHAJ)
- झारखंड स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी (JHALSA)
- बाबा बैजनाथ बासुकीनाथ श्राइन क्षेत्र विकास प्राधिकरण
- जेरेडा (JREDA)
- रिम्स (RIMS)
बता दें कि, झारखंड में कुल 31 स्वायत्त संस्थाएं हैं. ऑडिटर जनरल के अनुसार, इन सभी संस्थाओं को एक-एक कर बुलाया जाएगा और ऑडिट प्रक्रिया सुनिश्चित करवाई जाएगी.
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