शिबू सोरेन की जयंती पर डॉक्टर जमाल अहमद ने अपनी पुस्तक झारखंड विधानसभाध्यक्ष को समर्पित की

By : News11 Bharat
शिबू सोरेन की जयंती पर डॉक्टर जमाल अहमद ने अपनी पुस्तक झारखंड विधानसभाध्यक्ष को समर्पित की

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क:  दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती पर डॉक्टर जमाल अहमद ने अपनी पुस्तक "बाबा-ए-झारखण्ड: शिबू सोरेन दानिश्वरों की नजर में" झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो को समर्पित की. 416 पृष्ठ की यह पुस्तक उर्दू भाषा में लिखी गई है. लेखक के द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को इस  पुस्तक की विशिष्टताओं को भी विस्तृत रूप से बताया गया.

पुस्तक की विशिष्टताएं

1.⁠ इतिहास के पन्नों पर अंकित अमरता

यह ग्रंथ आने वाले सौ नहीं, हजार वर्षों तक उस युग का साक्ष्य रहेगा, जब झारखण्ड की मिट्टी ने एक योद्घा को जन्म दिया, जिसने अपने जीवन से यह प्रमाणित किया कि संघर्ष ही मनुष्य की सबसे बड़ी साधना है.

जब भविष्य की पीढ़ियाँ इस पुस्तक को पढेगी, तो उन्हें केवल घटनाएँ नहीं मिलेंगी वे शिबू सोरेन की आवाज सुनेगी, उनके संघर्ष की गूंज महसूस करेगी, और उनकी दृढता से प्रेरणा पाएंगी.

2.⁠ उर्दू में प्रथम व्यापक दस्तावेजीकरण

यह पहली पुस्तक है जिसने शिबू सोरेन के राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक व्यक्तित्व को उर्दू भाषा के माध्यम से इतने व्यवस्थित और अकादमिक रूप में प्रस्तुत किया है.

यह कार्य केवल एक भाषाई उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा के पुनर्जागरण का प्रतीक है क्योंकि उर्दू यहाँ एक भाषा नहीं, बल्कि जुड़ाव की भावना है.

3.⁠ समाज की विविध परतों का समागम

पुस्तक में विद्वानों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, राजनीतिज्ञों, समाजसेवियों और युवाओं के लेख शामिल हैं, यह समावेश स्वयं उस राजनीति का साक्ष्य है जो सीमओं से परे, सबको साथ लेकर चलने का नाम है.

4.⁠ पीढ़ियों का संवाद समय से परे एक वार्तालाप

पीढियों में लेखकों की आयु 105 वर्ष से लेकर 25 वर्ष तक फैली है.
यह पुस्तक समय की सीमाओं से परे एक संवाद है अतीत की बुद्धि और वर्तमान की ऊर्जा का संगम.

5.⁠ भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव

यह विविधता केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक एकता की मूर्त व्याख्या है.

"यह पुस्तक झारखण्ड के सामाजिक इतिहास का मौन और जनमानस की आकांक्षाओं का जीवित दस्तावेज है. यह पुस्तक हमारे समय की नहीं, आने वाले युगों की धरोहर है.

जब लोग भविष्य में झारखंड की कहानी पढ़ेंगे, तो यह पुस्तक उनका मार्गदर्शन करेगी- क्योंकि इसमें केवल इतिहास नहीं, बल्कि वह आत्मा है जिसने इतिहास रचा.

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