पंकज कुमार/न्यूज11 भारत
घाघरा गुमला/डेस्क: घाघरा प्रखंड के कुहीपाट पंचायत अंतर्गत गुनिया गांव में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराई गई मिट्टी-मोरम सड़क निर्माण योजना को लेकर ग्रामीणों ने अनियमितता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है. ग्रामीणों के अनुसार टीहरू साहू के घर से मंगा उरांव के घर तक करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण कराया गया है, लेकिन निर्माण में पर्याप्त मोरम का इस्तेमाल नहीं किए जाने के कारण बारिश के बाद सड़क की स्थिति बेहद खराब हो गई है. कई स्थानों पर सड़क कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गई है.
निर्माण के कुछ समय बाद ही बिगड़ी सड़क की हालत
ग्रामीणों के अनुसार सड़क का निर्माण जून-जुलाई में कराया गया था. निर्माण के बाद बारिश होते ही कई जगह सड़क धंसने लगी और कीचड़ जमा हो गया. ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया. उनका कहना है कि आसपास की मिट्टी का इस्तेमाल अधिक किया गया, जबकि सड़क को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त मोरम डाला जाना चाहिए था.
ग्रामीणों के विरोध और शिकायत के बाद अब सड़क को दोबारा बेहतर तरीके से बनाने की बात कही जा रही है. इस पर ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि निर्माण में कमी थी तो भुगतान से पहले इसकी गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं की गई.
भुगतान को लेकर भी ग्रामीणों के सवाल
योजना की भुगतान राशि को लेकर भी ग्रामीणों और पंचायत सचिव के बयानों में अंतर सामने आया है. ग्रामीण करीब दो लाख रुपये की राशि भुगतान होने की बात कह रहे हैं, जबकि पंचायत सचिव वीरेंद्र साहू ने दूरभाष पर बताया कि योजना में अब तक एक लाख रुपये का ही भुगतान हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि ऑनलाइन भुगतान संबंधी जानकारी में करीब दो लाख रुपये भुगतान दिखाई देने की बात सामने आई है. ऐसे में वास्तविक भुगतान राशि अभिलेखों और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
एमबी के आधार पर भुगतान, तो स्थल जांच किसने की
ग्रामीणों ने कनीय अभियंता जीवन एक्का द्वारा तैयार की गई एमबी (मेजरमेंट बुक) को लेकर भी सवाल उठाए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि एमबी के आधार पर भुगतान किया गया है तो सड़क की लंबाई, चौड़ाई, सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता का स्थल पर किस स्तर पर सत्यापन किया गया, इसकी भी जांच होनी चाहिए.
ग्रामीणों ने प्रखंड स्तर पर योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता की नियमित निगरानी होती तो सड़क की वर्तमान स्थिति सामने नहीं आती.
सड़क खराब होने से मरीजों और स्कूली बच्चों को परेशानी ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क गांव के लिए महत्वपूर्ण है. सड़क खराब होने के कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं और अन्य जरूरतमंदों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि एंबुलेंस समेत अन्य वाहन गांव के अंदर तक पहुंचने में कठिनाई महसूस करते हैं. वहीं स्कूली बच्चों को भी आवागमन में परेशानी हो रही है और कई बार दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ता है.
ग्रामीणों ने की जांच की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क निर्माण की स्थल जांच, एमबी की जांच, भुगतान की जांच तथा निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही योजना में वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए.
एक लाख का हुआ भुगतान पंचायत सचिव
पंचायत सचिव वीरेंद्र साहू ने बताया कि योजना में अब तक एक लाख रुपये का भुगतान हुआ है. ग्रामीणों द्वारा करीब दो लाख रुपये भुगतान होने की बात कही जा रही है. वास्तविक भुगतान की स्थिति संबंधित अभिलेख और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.
मोरम की कमी हुई मुखिया
मुखिया फागुवा उरांव ने कहा कि सड़क निर्माण में मोरम की कमी हुई है. उन्होंने बताया कि लाभुक समिति को सड़क का काम बेहतर तरीके से पूरा करने के लिए कहा गया है.
बारिश से खराब हुई सड़क
कनीय अभियंता जीवन एक्का ने बताया कि सड़क में मोरम की कमी की शिकायत मिली है. उनके अनुसार जिस समय काम कराया गया था, उस समय सड़क ठीक थी, लेकिन बारिश और पानी के कारण सड़क खराब हो गई. उन्होंने कहा कि सड़क का काम पूरा कराया जाएगा.
अब सवाल यह है कि यदि सड़क का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था तो निर्माण के कुछ ही समय बाद सड़क की स्थिति इतनी खराब कैसे हो गई? वहीं यदि निर्माण में कमी थी तो एमबी तैयार करने और भुगतान से पहले गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई? ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए.
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