मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत
खलारी/डेस्क: खलारी-बीजुपाड़ा मुख्य राजमार्ग एसएच-7 पर हुटाप मोड़ के समीप सड़क का एक हिस्सा धंस जाने से दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है. पुलिया निर्माण के दौरान सड़क और गार्डवाल के बीच समुचित तकनीकी व्यवस्था नहीं होने के कारण तेज बारिश में मिट्टी का कटाव हुआ, जिससे सड़क का एक हिस्सा धंस गया. इसके कारण मार्ग संकरा हो गया है और लगातार भारी वाहनों के आवागमन के बीच स्थिति गंभीर बनी हुई है. सड़क की स्थिति को देखते हुए संबंधित स्थान पर सुरक्षा की दृष्टि से धंसी हुई जगह को घेर दिया गया है और चेतावनी भी दी गई है.
घेराबंदी महज अस्थायी सुरक्षा उपाय, स्थायी समाधान मजबूत पुनर्निर्माण
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि महज घेराबंदी और चेतावनी से वाहनों एवं राहगीरों पर मंडरा रहा खतरा पूरी तरह कम नहीं हुआ है. सड़क पहले ही काफी संकरी हो चुकी है और भारी वाहनों के लगातार आवागमन के कारण दुर्घटना की आशंका बनी हुई है. लोगों का कहना है कि घेराबंदी महज अस्थायी सुरक्षा उपाय है, जबकि समस्या के स्थायी समाधान के लिए धंसी सड़क का मजबूत तरीके से पुनर्निर्माण और मिट्टी कटाव रोकने की ठोस तकनीकी व्यवस्था जरूरी है.आसपास के ग्रामीणों के अनुसार इस मार्ग पर दिन-रात भारी वाहनों का लगातार आवागमन होता है. हुटाप मोड़ पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण यहां मोड़ और ढलान भी है. सड़क के दोनों ओर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से रात के समय खतरा और बढ़ जाता है. ढलान पर वाहनों की गति बढ़ने तथा संकरी सड़क पर अचानक सामने से भारी वाहन आने की स्थिति में कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है.
स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों और रोड अथॉरिटी से की अपील
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के कारण जिस हिस्से में मिट्टी का कटाव हुआ है, वहां दोबारा कटाव रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था किए जाने की जरूरत है. इसके साथ ही गार्डवाल को दुरुस्त कर सड़क का स्थायी रूप से पुनर्निर्माण कराया जाना चाहिए. केवल चेतावनी और घेराबंदी के भरोसे सड़क को छोड़ना भविष्य में गंभीर हादसे का कारण बन सकता है. स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों और रोड अथॉरिटी से जल्द से जल्द स्थल का निरीक्षण कर धंसी सड़क का पुनर्निर्माण कराने, गार्डवाल को दुरुस्त करने तथा मिट्टी कटाव रोकने के लिए स्थायी तकनीकी व्यवस्था करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़े हादसे के बाद की जाने वाली कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा. अब देखना यह है कि रोड अथॉरिटी चेतावनी और घेराबंदी तक सीमित रहती है या फिर दुर्घटना की आशंका को गंभीरता से लेते हुए सड़क के पुनर्निर्माण की दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाती है.
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