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सिमडेगा/डेस्क: सिमडेगा में रूबेला वायरस ने दस्तक दे दी है. इस सीजन में राज्य में रूबेला से पीड़ित पहला मामला सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड के ताराबोगा और कुड़पनी दो गांव में मिला है. दो बच्चियों में रूबेला संक्रमण की पुष्टि रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में खून के सैंपल की जांच के बाद हुई है. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है और संक्रमण की रोकथाम कवायद शुरू कर दी है.
सिविल सर्जन डॉ सुंदर मोहन सामद ने बताया कि विगत 15 सितंबर को कुड़पानी और ताराबोगा गांव से ब्लड सैंपल कलेक्ट कर रिम्स भेजा गया था. जहां इन सैंपलों में दो रूबेला पॉजिटिव पाए गए. उन्होंने बताया कि रुबेला एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से हवा के माध्यम से फैलता है. इसके प्रमुख लक्षणों में हल्का बुखार, सिरदर्द, आंखों में लालिमा तथा शरीर पर गुलाबी रंग के चकत्ते शामिल हैं. गर्भवती महिलाओं के लिए रूबेला संक्रमण विशेष रूप से गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. गर्भावस्था के दौरान संक्रमण होने पर बच्चे में जन्मजात रूबेला सिंड्रोम का खतरा रहता है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इससे बचाव का प्रभावी उपाय समय पर टीकाकरण है.
सिविल सर्जन ने बताया कि एक बच्चे के रूबेला पॉजिटिव पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग दोनों गांव में कैंप कर विशेष टीकाकरण कर रही है. इसके तहत पांच वर्ष तक के बच्चों को चिन्हित कर एमआर का टीका दिया जा रहा है. जिन बच्चों को एमआर की एक डोज के बाद दूसरी डोज नहीं मिली है, उन्हें दूसरी डोज दी जाएगी. वहीं, जिन बच्चों को दोनों डोज मिल चुकी हैं, उन्हें अतिरिक्त डोज देने की व्यवस्था की जाएगी.सिविल सर्जन ने ठेठईटांगर रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए संक्रमण की रोकथाम के लिए निगरानी और अन्य जरूरी उपाय सुनिश्चित करने को कहा है. स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य वर्ष 2026 तक देश से खसरा और रूबेला का उन्मूलन करना है. सिविल सर्जन ने बताया कि रुबेला वायरस गर्भवती महिलाओं के लिए काफी खतरनाक होती है.