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सिमडेगा/डेस्क: रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक है. इस बार सिमडेगा में यह पर्व महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का संदेश भी लेकर आ रहा है. जिले की पलाश महिला समूह से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर और मेहनत से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं. इन राखियों में रेशम के धागों के साथ महिलाओं के सपने, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर बनने की कहानी भी बुनी जा रही है.
रक्षाबंधन को लेकर पलाश महिला समूह की महिलाएं कई दिनों से राखियां तैयार करने में जुटी हुई हैं. अलग-अलग रंगों, डिजाइनों और सजावटी सामग्रियों से तैयार की जा रही ये राखियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं. हाथों से तैयार होने के कारण इन राखियों में स्थानीय महिलाओं की मेहनत और रचनात्मकता साफ नजर आती है. त्योहार के दौरान राखियों की बढ़ती मांग ने महिलाओं के उत्साह को भी बढ़ाया है.

पलाश महिला समूह से जुड़कर महिलाएं न केवल अपने हुनर को पहचान दिला रही हैं, बल्कि घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों में भी भागीदारी निभा रही हैं. राखियों के निर्माण और बिक्री से होने वाली आय उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन रही है. इससे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ रही है.
महिलाओं का कहना है कि पहले उनके हुनर का इस्तेमाल मुख्य रूप से घर तक सीमित था, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपने उत्पाद तैयार करने और बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है. त्योहारों के अवसर पर स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों की मांग बढ़ने से उन्हें अपने काम का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद भी रहती है.
पलाश महिला समूह की राखियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है. साथ ही, लोग स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को खरीदकर उनके हुनर और मेहनत को प्रोत्साहन दे रहे हैं.
आगामी रक्षाबंधन पर्व को लेकर समाहरणालय परिसर के मुख्य गेट के समीप जेएसएलपीएस के पलाश महिला समूह की ओर से राखी एवं मिठाई का स्टॉल लगाया गया है. स्टॉल का उपायुक्त सिमडेगा कंचन सिंह ने अवलोकन किया. उपायुक्त ने महिला समूह की दीदियों द्वारा हस्तनिर्मित विभिन्न प्रकार की आकर्षक राखियों को देखा और उनके प्रयासों की सराहना की. राखियों की गुणवत्ता एवं सुंदरता देखकर उपायुक्त काफी प्रसन्न हुईं. उन्होंने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे इसी तरह मेहनत और लगन से कार्य करते हुए इससे भी बेहतर एवं आकर्षक राखियां तैयार करें. इस पहल से महिला समूह की सदस्यों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और अपनी हस्तकला को बाजार उपलब्ध कराने का अवसर मिल रहा है.
इस बार जब रक्षाबंधन पर किसी भाई की कलाई पर पलाश महिला समूह की राखी सजेगी, तो वह केवल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक नहीं होगी. उसमें नारी शक्ति, आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और ग्रामीण विकास की कहानी भी दिखाई देगी. सचमुच, रेशम के इन धागों से महिलाएं न केवल रिश्तों की डोर मजबूत कर रही हैं, बल्कि अपने और अपने परिवार के भविष्य की नई तस्वीर भी बुन रही हैं.
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