अवैध कोयले के नेटवर्क

धनबाद से खलारी-पिपरवार और मगध तक अवैध कोयले के नेटवर्क की चर्चा

धनबाद से लातेहार-चतरा होते हुए कोयलांचल तक पहुंचने की बात, कार्रवाई के बावजूद नेटवर्क की सक्रियता पर उठ रहे सवाल

By : Ark Sahuliyar
धनबाद से खलारी-पिपरवार और मगध तक अवैध कोयले के नेटवर्क की चर्चा

मुमताज अहमद/न्यूज़11 भारत 
खलारी/डेस्क:
झारखंड के कोयलांचल में अवैध कोयला कारोबार का नेटवर्क कितना गहरा और दूर तक फैला हुआ है, इसे लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. सूत्रों के अनुसार धनबाद से शुरू होने वाला कथित नेटवर्क लातेहार और चतरा होते हुए खलारी-पिपरवार तथा मगध क्षेत्र तक अपनी पहुंच बनाए हुए है. अलग-अलग इलाकों में सक्रिय लोगों के आपसी संपर्क और कथित स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से अवैध कोयले को खपाने की चर्चा है.

सूत्रों का दावा है कि धनबाद क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों के संपर्क लातेहार और चतरा के रास्ते खलारी-पिपरवार-मगध कोयलांचल तक होने की बात सामने आती रही है. इसके बाद पिपरवार, मगध और आसपास के कोयला क्षेत्रों में सक्रिय स्थानीय लोगों के माध्यम से अवैध कोयले की खरीद-बिक्री और परिवहन किए जाने की चर्चा है. हालांकि इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

धनबाद से शुरू होकर कहां तक पहुंचता है नेटवर्क?
अवैध कोयला कारोबार पर अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई और जब्ती के बावजूद इसके पूरी तरह समाप्त नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के बाद रास्ते और ठिकाने बदल दिए जाते हैं, लेकिन कारोबार से जुड़े संपर्क बने रहने की बात कही जाती है.

ऐसे में सवाल सिर्फ अवैध कोयले की जब्ती का नहीं, बल्कि उस कोयले के स्रोत, संग्रहण, परिवहन और अंतिम खपत तक जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच का है. यदि अलग-अलग जिलों में हुई कार्रवाई और जब्ती के मामलों को आपस में जोड़कर जांच की जाए तो कथित नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है.

स्थानीय नेटवर्क के बिना लंबी दूरी का खेल संभव?
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाहर से आने वाले लोगों के लिए किसी क्षेत्र में लंबे समय तक अवैध गतिविधियां चलाना स्थानीय स्तर पर संपर्क के बिना आसान नहीं हो सकता. यही कारण है कि जांच में सिर्फ वाहन चालक या मौके पर पकड़े गए लोगों तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय पूरे नेटवर्क और इसके पीछे के कथित संचालकों तक पहुंचने की मांग उठ रही है.

खलारी-पिपरवार क्षेत्र में पहले भी अवैध कोयले के खिलाफ कार्रवाई होती रही है. इसके बावजूद यदि धनबाद से लातेहार-चतरा होते हुए मगध तक नेटवर्क सक्रिय होने की चर्चाएं सही हैं, तो यह संबंधित सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन के लिए गंभीर जांच का विषय है.