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धनबाद/डेस्क: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की भूमिका बेहद अहम है. वर्ष 2047 के भारत की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आज से ही नई तकनीकों पर काम करना होगा. यह बात रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने धनबाद स्थित IIT-ISM में कही. संजय सेठ 20वीं नेशनल फ्रंटियर्स ऑफ इंजीनियरिंग संगोष्ठी और ‘इनोवेशन इन मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज’ के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने छात्रों को 2047 के भारत का रोडमैप बताते हुए कहा कि आने वाले समय की टेक्नोलॉजी कैसी होगी, इस पर अभी से विचार करने की जरूरत है. केवल विचार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इन तकनीकों को जमीन पर उतारकर देश के विकास में उनका इस्तेमाल भी करना होगा.
उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में पानी मौजूद है. माइंस के अंदर मौजूद लाखों क्यूबिक मीटर पानी का सदुपयोग करने के लिए नई तकनीक विकसित की जा सकती है. इसका इस्तेमाल कृषि के क्षेत्र में किया जाए तो देश में बड़ी क्रांति लाई जा सकती है. रक्षा राज्य मंत्री ने छात्रों से कहा कि यह इनोवेशन का दौर है और टेक्नोलॉजी हर घंटे बदल रही है. ऐसे में युवाओं को केवल पिछली उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आने वाले 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन पर काम करना चाहिए.
उन्होंने IIT-ISM के छात्रों को 2047 का ब्रांड एम्बेसेडर बताते हुए कहा कि देश के भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी. आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीकी संस्थानों और युवा इंजीनियरों को नए समाधान विकसित करने होंगे.
संजय सेठ ने IIT-ISM से नशामुक्त भारत और टीबी मुक्त भारत के अभियान में भी सक्रिय योगदान देने की अपील की. उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी युवाओं के व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
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