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रांची/डेस्कः- राममंदिर, आर्टिकल 370, नागरिकता संशोधन बिल, तीन तलाक, सीएए, यूसीसी, के बाद वक्फ बोर्ड संशोधन कर अपने समर्थकों को संतुष्ट करने में अपनी भुमिका अदा की साथ ही राजनीति को एक नए मोड़ की तरफ मोड़ दिया है. ऐसे-ऐसे कदम मजबूती से उठाए जाने के बाद अब देशवासियों के मन में ये ख्याल तो आता ही होगा कि आखिर अगला कदम क्या होने वाला है.
बीजेपी सरकार ने अपने दो कार्यकाल और अभी के 10 महीने के कार्यकाल में कई अहम फैसले ले चुके हैं. कई बड़े फैसले विवादास्पद भी रहा है. इन सारे मुद्दों के वैचारिक आधार आरएसएस की सोच से गहरा संबध रखते हैं. संघ लंबे समय तक एक ऐसी राष्ट्र की कल्पना करते आई है जो सांस्कृतिक एकता व अखंडता पर आधारित हो.
राममंदिर, 370, 3-तलाक व सीएए लागू करवाना संघ के ही सोच का परिणाम है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर बीजेपी का अगला कदम क्या होने वाला है. क्या बीजेपी मथुरा-काशी, एनआरसी, जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों पर काम करने वाली है.
संघ व बीजेपी के विचारधारा को देखें तो भारत एक ऐसी सांस्कृतिक इकाइ है जिसमें समान विधान, समान पहचान व समान भाषा होनी चाहिए.
राममंदिर
अयोद्धा में राममंदिर का निर्माण करके बीजेपी ने हिंदू गौरव को स्थापित करने का काम किया है. यह एक ऐसा मुद्दा था जिसमें दशकों संघर्ष चला है. तब जाकर ये सपना साकार हुआ है.
अनुच्छेद 370:
370 भी विवादास्पद मुद्दों में से एक था, जिसे वीजेपी ने हटाकर एक राष्ट्र व एक संविधान के विचार को मजबूत किया है. जनसंघ के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसकी संकल्पना बहुत पहले ही कर दिया था.
ट्रिपल-तलाक
ये भी एक देश के लिए संवेदनशील मुद्दा ही था, यह धर्मनिरपेक्षता के नए दायरे के तरफ इशारा करता है, यह बताता है कि निजी कानून की मान्यताओं से राष्ट्रीय कानून ज्यादा महत्व रखता हैं.
वक्फ बोर्ड-
बीजेपी ने बताया कि यह कानून मुस्लिम समाज के लिए रिफार्म व महिला व गरीबों के हक की बात करता है. प्रधानमंत्री ने भी इसी पक्ष के तरफ इशारा करते हुए अपनी बात कही.
पीएम ने एक्स में पोस्ट करते हुए कहा है कि "दशकों से वक्फ व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी नजर आ रही थी. इससे मुख्य रूप से हमारी मुस्लिम माताओं-बहनों, गरीब और पसमांदा मुसलमान भाई-बहनों के हितों को बहुत नुकसान हो रहा था. अब संसद द्वारा पारित विधेयक पारदर्शिता को बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के अधिकारों की रक्षा में भी मददगार बनेगा."
क्या होगा अगला एजेंडा..
मथुरा-काशी विवाद
बीजेपी के झोली में ऐसे कई मुद्दे हैं जिनका राजनीतिक, सामाजिक व धार्मिक असर है, मथुरा व वाराणसी का भी मुद्दा कुछ ऐसा ही है.
हालांकि बिजेपी ने वाराणसी व मथुरा का मुद्दा अपने घोषणापत्र में शामिल करने से दूरी बनाया है. बीजेपी न्यायालय के जरिए इसका समाधान चाहती है. भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 2022 में ही कह दिया था कि विवादास्पद धार्मिक मामलों का फैसला कोर्ट व संविधान के द्वारा की जाएगी और पार्टी उनकी बातों को ही मान कर चलेगी. ये मामले इस समय अभी अदालतों में हैं.
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)
एकसमान नागरिकता संहिता का मतलब ही है देश में एक समान नागरिक कानून का होना, चाहे उनका धर्म, जाति, लिंग, समुदाय कुछ भी हो. यह तलाक, विवाह, उत्तराधिकारी, गोद लेने की परंपरा, संपत्ति जैसे धार्मिक मामलों के अलग अलग व्यक्तिगत कानून को खत्म कर एकीकृत कानून की वकालत करता है. बतादें कि यूसीसी की जिक्र संविधान में आर्टिकल 44 से लिया गया है. जो देश में एक समान नागरिक कानून संहिता की बात करता है.
एनआरसी
एनआरसी, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स भारत में एक ऑफिसियल रजिस्टर है, जो देश के वैध नागरिक की पहचान की बात करता है. इसका मेन परपस है अवैध प्रवीसियों को बाहर करना. भारत का एकमात्र राज्य है असम जो एनआरसी को अपडेट किया हुआ है. बता दें कि यह प्रक्रिया 2013 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरु की गई थी.
गृहमंत्री अमित शाह ने नवंबर 2019 में संसद में कहा था कि पूरे देश में एनआरसी लागू किया जाएगा. हालांकि सरकार ने इसके बाद इसपर कुछ स्पस्ट कदम नहीं उठा पाई है.