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रांची/डेस्क: कांग्रेस नेता राहुल गांधी चुनाव आयोग पर लगातार हमले करने की रणनीति अपनायी हुई है. अपनी इस रणनीति के तहत वह जनता को यह संदेश देना चाहते हैं कि चुनाव आयोग धांधली कर रहा है और केन्द्र में बैठी भाजपा सरकार को जीत दिलाने में मदद कर रहा है. कांग्रेस को भी यह लग रहा है कि भाजपा की मोदी सरकार को घेरने, उसको हराने और अपनी जीत सुनिश्चित करने का एक बड़ा हथियार मिल गया है. परन्तु शायद ऐसा नहीं है. अगर ऐसा होता तो कांग्रेस पार्टी के अन्दर इस मुद्दे को लेकर दो तरह की राय नहीं होती. कांग्रेस में कुछ नेता तो राहुल गांधी की पीठ थपथपाने में व्यस्त तो दूसरी ओर कुछ कांग्रेस जन के लिए यह मुद्दा चिंता का भी विषय है. दरअसल, राहुल गांधी चुनाव आयोग के बहाने भाजपा सरकार पर हमला करने के क्रम में अपनी पार्टी के आंतरिक सिस्टम पर ही उंगली उठा बैठे हैं. अब तो दबी जुबान में यह भी चर्चा होने लगी है कि पार्टी के इस आंतरिक सिस्टम को छुपाने के लिए ही राहुल गांधी सारा प्रोपोगेंडा कर रहे हैं.
आखिर यह प्रशन उठा क्यों?
इस बात को समझने के लिए आपको राहुल गांधी के गुरुवार ही नहीं बल्कि उससे पहले भी दिये गये बयानों पर गौर करना होगा गुरुवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कर्नाटक और महाराष्ट्र में मतदाता सूची में सेंट्रलाइज्ड सॉफ्टवेयर का उपयोग करके वोट हटाने और जोड़ने का आरोप लगाया. इसी क्रम में राहुल गांधी ने कर्नाटक की महादेवपुरा सीट पर एक लाख वोटों की गड़बड़ी का भी आरोप लगाया है. कांग्रेस सांसद के इसी बयान पर पार्टी के कई नेता असहज हो गये हैं. अगर कर्नाटक की इस सीट पर एक लाख वोटों की गड़बड़ी हुई, तो पार्टी के बूथ स्तर के एजेंट (BLA) उस समय क्या कर रहे थे? पार्टी के ये नेता मान रहे हैं है यह तो सीधे तौर पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर उंगली उठाने जैसा है. क्योंकि ऐसा तो तभी हो सकता है जब पार्टी के BLA 'सो' रहे हों. इतनी बड़ी गड़बड़ी का मतलब है कि जमीनी स्तर का पार्टी का संगठन खोखला हो चुका है.
कांग्रेस के कई नेता तो यह भी नहीं समझ पा रहे हैं कि इस 'वोट चारी'अभियान का अंतिम लक्ष्य क्या है. फिर ‘वोट चोरी’ जैसे मुद्दों ने कांग्रेस को बेरोजगारी, सामाजिक न्याय और भ्रष्टाचार जैसे मूल मुद्दों से दूर कर दिया है. यो तो पार्टी के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है या फिर ठोस मुद्दों से पार्टी भटक गयी है. पार्टी के कुछ नेता मान रहे हैं कि यह अभियान संगठन की जमीनी कमजोरी को छिपाने का ही प्रयास है. पार्टी को लोकतंत्र बचाने से पहले पार्टी को बचाना ज्यादा जरूरी है. यानी राहुल गांधी को पार्टी के अन्दर जो दो विचारधाराएं चल निकली हैं, फिलहाल इससे निबटना ज्यादा जरूरी है, क्योंकि 'सच' उजागर करने के चक्कर में पार्टी का ही 'सच' न उजागर होता रहे.
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