आधा विश्व नहीं जानता! काले कपड़े से क्यों ढका जाता है काबा?

By : Vaibhaw Vikram
आधा विश्व नहीं जानता! काले कपड़े से क्यों ढका जाता है काबा?

न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क:
इस्लाम के सबसे पाक स्थल काबा से हम सभी भली भांति अवगत हैं. सभी मुस्लिम मदीना की यात्रा काबा के दर्शन के लिए करते हैं. जिसे हम सभी हज के नाम से अभी जानते हैं. विश्व में मौजूद सभी मुस्लिम का सपना होता है कि वह अपने इस जीवन में एक बार काबा का दर्शन करना चाहते हैं. हम सभी ने काबा की तस्वीर भी कहीं न कहीं देखी है. जिसमें काबा काले रंग के कपड़े से ढका रहता है. इस कपड़े को किसवा कहा जाता हैं. कई लोगों का मानना है कि काले रंग का मतलब पूरी तरह से धार्मिक है लेकिन इतिहासकार कहते हैं कि यह परंपरा वास्तव में ऐतिहासिक प्रथाओं और सदियों से चली आ रही शाही पसंद से ज्यादा जुड़ी हुई है. तो चलिए आज जानते हैं क्या है इस काले कपड़े का महत्व और क्यों काबा को इस काले रंग के कपड़े से ढका जाता है. 
 
ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स में दर्ज जानकारी के अनुसार, इस्लामी इतिहास में काबा को ढके जाने वाले कपड़े के रंग में बदलाव किए गए हैं. काबा को ढकने के लिए पिछली सदियों में सफेद, लाल और हरे कपड़े से बनी चादरों का इस्तेमाल किया जा चुका है. बताया जाता है कि अब्बासिद राजवंश के शासनकाल के दौरान काबा को काले रंग के कपड़े से ढका जाता था. जिसके बाद से यह रंग स्थायी हो गया.

काले रंग को चुनने के पीछे की वजह इसकी मजबूती थी. किसवा मजबूत काले रंग के रेशम के धागे से बनाया जाता है. जिसे मक्का की काफी ज्यादा गर्मी और धूप को सहन करने के लिए तैयार किया जाता है. इस कपड़े को हर साल उमरा और हज के दौरान काबा में आने वाले लाखों तीर्थ यात्रियों के लगातार स्पर्श का भी सामना करना पड़ता है. इस काले रंग का रखने के पीछे एक और कारण है. यह कारण है इसमें लगे सोने और चांदी के धागे हैं. चादर के ऊपर  सोने और चांदी से कुरान की आयतें सिली गई है. जो काले रंग के कपड़े के ऊपर काफी  सुंदर दिखाई देती हैं. किसवा पर की गई अरबी सुलेख काबा की सबसे प्रतिष्ठित कलात्मक विशेषताओं में से एक बन गई है.

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