न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: 3 जून को पूरी दुनिया विश्व साइकिल दिवस मनाती है. दुनिया के विकसित देशों में तमाम सुविधाओं के रहते हुए साइकिल किसी न किसी रूप में प्रचलित है, लेकिन भारत जहां एक समय शादी-ब्याह के अवसर पर साइकिल उपहार में देना शान की बात समझी जाती थी, आप उसे देश में काफी उपेक्षित समझा जा रहा है, अब बेहद कम लोग साइकिल का इस्तेमाल करते है. देश के कई राज्यों की सरकारें स्कूलों में साइकिल वितरण अवश्य करती है, कुछ छात्र-छात्राएं इनका उपयोग करते हैं, लेकिन ऐसा ज्यादातर गांवों में ही देखा जा सकता है, शहरों में बढ़ती गाड़ियों की भीड़ में छात्रों द्वारा साइकिल चलाया जाने सुरक्षित नहीं रह गया है. इसलिए इसका उपयोग और भी कम हो गया है.
आज पश्चिमी देशों में संघर्ष से उपजे ऊर्जा संकट, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के कारण साइकिल की आवश्यकता तो महसूस की जा रही है, लेकिन इसके बाद भी साइकिलों का उपयोग नहीं बढ़ पाया है. भले ही पूरी तरह से न सही, छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए साइकिल का उपयोग तो किया ही जा सकता है, जैसे निकट के बाजार साइकिल से चले गए. पास के किसी ऑफिस और बैंक के काम के लिए साइकिल का उपयोग कर उसकी उपयोगिता को जिंदा रख सकते हैं, और अभी जो ऊर्जा संकट सामने आया है, उस पर कुछ हद तक अंकुश लगाया जा सकता है.
जहां तक विश्व साइकिल दिवस के शुरुआत की बात है तो अप्रैल, 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यह दिवस मनाने का निर्णय लिया था. संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस निर्णय के बाद 3 जून को हर साल साइकिल दिवस मनाया जा रहा है.
विश्व में जितने भी आविष्कार हुए हैं, उनमें साइकल के आविष्कार को सबसे अनूठा माना जा सकता है. क्योंकि दो पहियों पर सवारी की कल्पना को अद्वितीय माना जा सकता है. इसी आविष्कार का ही परिणाम मोटर से चलने वाले दो पहिया वाहन हैं. साइकिल का आविष्कार 18वीं शताब्दी हो चुका था, समय के साथ साइकिल के रूपों में बदलाव भी होता गया और आज कई रूपों में साइकिल हमारे सामने हैं. रोड बाइक, टूरिंग बाइक, हार्डटेल बाइक, फुल सस्पेंशन बाइक, साइक्लोक्रॉस बाइक, फोल्डिंग बाइक, इतना ही नहीं, जिनके पास बाहर जाकर साइक्लिंग का समय नहीं है, वे जिम में जाकर साइक्लिंग कर फिटनेस बढ़ाने के लिए इसका उपयोग करते हैं.
साइकिल के साथ एक रोचक बात भी है. 100 वर्ष पहले साइकिल 10 रुपये में मिल जाती थी. आज सामान्य साइकिल के लिे 5 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं. मगर कुछ साइकिलों की कीमत तो आंखें चौड़ी करने के लिए काफी हैं. क्या आपको पता है कि ट्रेक बटरफ्लाई मैडोने नाम की साइकिल की कीमत 3.75 करोड़ है? दरअसल, इसके फ्रेम में सोना लगा जड़ा हुआ है. जापानी कंपनी द्वारा बनाई गई ट्रेक योशिमोटो नारा साइकिल भी कम कीमती नहीं है, इसके लिए भी 1.5 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं. कहने का मतलब इतनी कीमत में दो महंगी कार खरीदी जा सकती है.
अब थोड़ी बात साइकिल चलाने के फायदे की
साइकिल को गरीबों की सवारी ही नहीं कह सकते, क्योंकि वैज्ञानिक दृष्टि से भी साइकिल चलाना शारीरिक और मानसिक रूप से काफी फायदेमंद है-
- साइकिल चलाने इम्यूनिटी बूस्टर का काम करता है.
- बॉडी की एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न होती है.
- नियमित साइकिल चलाने वालों की पूरी बॉडी की एक्सरसाइज हो जाती हैत
- कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम किया जा सकता है.
- डायबिटीज के कारण होने वाली मृत्यु का खतरा 24 फीसदी तक कम किया जा सकता है.
- साइकिल चलाने से दिमाग तेज होता है.
- तनाव, अवसाद या चिंता कम करने और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है.
यह भी पढ़ें: खान सर के पटना के कोचिंग कैम्पस पर चली 8-10 राउंड गोलियां, खान सर को डराने के मकसद की गयी गोलीबारी