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रांची/डेस्क: झारखंड पुलिस सर्विस एसोसिएशन ने राज्य के कुछ डीएसपी अधिकारियों पर लगे दोहरा वेतन लेने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. एसोसिएशन का कहना है कि यह मामला किसी भी तरह के घोटाले या जानबूझकर किए गए फर्जीवाड़े से जुड़ा नहीं है, बल्कि एक साधारण क्लर्कियल गलती का परिणाम है.
गौरतलब है कि पहले आरोप लगाए गए थे कि राज्य के 14 कोषागारों से कथित सांठगांठ कर डीएसपी, शिक्षकों और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों द्वारा फर्जी तरीके से दोहरा वेतन निकाला गया. इस मामले में पलामू जिले में तैनात चार पुलिस उपाधीक्षकों मुकेश कुमार महतो, मणिभूषण प्रसाद (सेवानिवृत्त), मो. नौशाद आलम और राजेश यादव (परिव्ययमान डीएसपी) के नाम भी सामने आए थे.
हालांकि, एसोसिएशन ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि पूरी घटना तकनीकी खामी या कार्यालयी त्रुटि के कारण हुई. उनका दावा है कि किसी भी अधिकारी की मंशा गलत नहीं थी और न ही किसी ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया. एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और अधिकारियों की छवि पर लगे दाग को हटाया जा सके.
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