पंकज कुमार/न्यूज11 भारत
घाघरा/डेस्क: घाघरा के सरकारी स्कूल का हाल नवंबर महीना समाप्ति की ओर है. पिछले कुछ दिनों से राज्य में तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है. पछुआ हवाओं के कारण कनकनी बढ़ गई है. बढ़ती ठंड का असर आम जनों के साथ-साथ स्कूली बच्चों पर भी साफ दिख रहा है.इधर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के बीच अब तक स्वेटर, टोपी और जूते का वितरण नहीं हो पाया है. ठिठुरन भरी सुबह में विशेषकर ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों से आने वाले मासूम बच्चे बिना पर्याप्त गर्म कपड़ों के स्कूल आने को विवश हैं.
राज्य सरकार की योजना के तहत हर वर्ष कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को स्वेटर, जूता, मोजा एवं यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाती है. कक्षा 1 और 2 के बच्चों के लिए स्वेटर की खरीदारी विद्यालय स्तर पर की जाती है, जबकि कक्षा 3 से 8 तक के बच्चों को डीबीटी के माध्यम से राशि प्रदान की जाती है. लेकिन इस वर्ष समय पर फंड रिलीज़ नहीं होने से हजारों बच्चे अब भी ठंड में कांप रहे हैं. कई अभिभावक आर्थिक तंगी के कारण अपने स्तर से भी गर्म कपड़े की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं और सरकारी सहायता की राह देख रहे हैं.
जिला शिक्षा अधीक्षक नूर आलम खान ने बताया कि अब तक लगभग 56 प्रतिशत बच्चों के खाते में राशि भेजी जा चुकी है. शेष 44 प्रतिशत बच्चों के लिए राशि राज्य से आवंटन मिलते ही तत्काल डीबीटी के माध्यम से भेज दी जाएगी.
फंड की कमी और डीबीटी में देरी के कारण 44 प्रतिशत बच्चे कड़कड़ाती ठंड में बिना स्वेटर, जूता और मोजा के स्कूल जा रहे हैं. अभिभावकों का कहना है कि यदि जल्द पहल नहीं की गई, तो इसका असर बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर पड़ेगा.
ग्रामीणों और अभिभावकों ने सरकार एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि लंबित राशि शीघ्र जारी की जाए, ताकि ठंड के इस मौसम में बच्चों को सुरक्षा मिल सके और वे बिना ठिठुरे नियमित रूप से स्कूल आ–जा सकें.
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