हाई कोर्ट

36 साल तक चला मुकदमा, दो आरोपियों की मौत के बाद आया हाई कोर्ट का फैसला

झारखंड उच्च न्यायालय ने सरायकेला में साल 1990 में हुए एक गोलीकांड मामले में पूरे 36 साल बाद अपना अंतिम फैसला सुनाया है.

By : Ark Sahuliyar
36 साल तक चला मुकदमा, दो आरोपियों की मौत के बाद आया हाई कोर्ट का फैसला

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
झारखंड उच्च न्यायालय ने सरायकेला में साल 1990 में हुए एक गोलीकांड मामले में पूरे 36 साल बाद अपना अंतिम फैसला सुनाया है. अदालत ने मुकदमे के लंबे समय तक लंबित रहने और रिकॉर्ड पर पुख्ता सबूतों के अभाव को देखते हुए मुख्य आरोपी की 7 साल की जेल की सजा में बड़ा संशोधन किया है.

सुनवाई के दौरान पिता-पुत्र का निधन
निचली अदालत द्वारा साल 2003 में सजा सुनाए जाने के बाद तीन दोषियों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी. हालांकि, हाई कोर्ट में सुनवाई लंबित रहने के दौरान ही तीन में से दो मुख्य आरोपियों (पिता अमूल्य कुमार दास और पुत्र ज्ञानी दास) की मृत्यु हो गई. इसके बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ अपील को समाप्त कर दिया था और अब केवल जीवित बचे एकमात्र आरोपी लक्ष्मीकांत दास को लेकर अंतिम निर्णय आया है.

क्या था 36 साल पुराना विवाद?
मामला सरायकेला खरसावां जिले के घागी गांव का है, जहां 13 जून 1990 को एक बाड़ी (बगीचे) की घेराबंदी को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ था. शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप था कि लक्ष्मीकांत दास ने अपने पिता की बंदूक से फायरिंग की, जिससे तीन लोग घायल हो गए थे. इस मामले में साल 2003 में फास्ट ट्रैक कोर्ट, सरायकेला ने आरोपियों को हत्या के प्रयास (IPC 307) के तहत दोषी मानते हुए 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

दो दशक से मुकदमे की मार झेल रहा है अपीलकर्ता - हाई कोर्ट
न्यायाधीश अरुण कुमार राय की एकल पीठ ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद पाया कि रिकॉर्ड पर घायलों की कोई आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट (Injury Report) उपलब्ध नहीं थी. साथ ही, अभियुक्तों की ओर से दिए गए 'आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग' के तर्क को कोर्ट ने परिस्थितियों के अनुकूल पाया.

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि चूंकि यह घटना साल 1990 की है और अपीलकर्ता दो दशकों से अधिक समय से मुकदमेबाजी की मार झेल रहा है, इसलिए न्याय के हित में सजा को संशोधित किया जाना उचित होगा.

अदालत का अंतिम आदेश
उच्च न्यायालय ने लक्ष्मीकांत दास को हत्या के प्रयास (धारा 307) और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के आरोपों से 'बेनिफिट ऑफ डाउट' देते हुए राहत दी. कोर्ट ने दोषसिद्धि को संशोधित कर खतरनाक हथियार से साधारण चोट पहुंचाने (IPC की धारा 324/34) में बदल दिया. चूंकि लक्ष्मीकांत दास पहले ही 5 महीने और 15 दिन जेल की सजा काट चुके थे, इसलिए कोर्ट ने उनके द्वारा अब तक काटी गई अवधि को ही पूर्ण सजा मानते हुए उन्हें बेल बांड की लायबिलिटी से मुक्त कर दिया.

यह भी पढ़ें- 1 लाख के दहेज के लिए पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को राहत नहीं, हाई कोर्ट से याचिका खारिज

 

संबंधित सामग्री

मगध-आम्रपाली कोल क्षेत्र में CISF की बड़ी कार्रवाई, फुलवरिया साइडिंग से 275 टन अवैध कोयला बरामद, ड्रोन से भी नज़र

मगध-आम्रपाली कोल क्षेत्र में CISF की बड़ी कार्रवाई, फुलवरिया साइडिंग से 275 टन अवैध कोयला बरामद, ड्रोन से भी नज़र

चतरा जिले के मगध-आम्रपाली कोयला क्षेत्र से एक बड़ी खबर है. कोयला माफियाओं और अवैध खनन के खिलाफ सीआईएसएफ (CISF) ने एक बार फिर तगड़ा प्रहार किया है.

1 लाख के दहेज के लिए पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को राहत नहीं, हाई कोर्ट से याचिका खारिज

1 लाख के दहेज के लिए पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को राहत नहीं, हाई कोर्ट से याचिका खारिज

झारखंड उच्च न्यायालय ने धनबाद के एक चर्चित दहेज हत्या मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी पति की 7 साल की जेल की सजा को बरकरार रखा है.

पारगामा झूमर की थाप पर झूमे दर्शक, विधायक साविता महतो रहीं मुख्य अतिथि

पारगामा झूमर की थाप पर झूमे दर्शक, विधायक साविता महतो रहीं मुख्य अतिथि

कार्यक्रम में झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया और मेदिनीपुर क्षेत्र से पहुंचे कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन किया

बिनोद धाम में जयंती खास आयोजन, बाउंड्री वॉल के शिलान्यास से विकास को मिली नई दिशा

बिनोद धाम में जयंती खास आयोजन, बाउंड्री वॉल के शिलान्यास से विकास को मिली नई दिशा

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी शामिल हुए

हर 'Breach of Promise' रेप नहीं, शादी से मुकर जाना 'झूठा वादा' नहीं माना जा सकता: हाई कोर्ट

हर 'Breach of Promise' रेप नहीं, शादी से मुकर जाना 'झूठा वादा' नहीं माना जा सकता: हाई कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति परिस्थितियों या परिवार के विरोध के कारण शादी नहीं कर पाता है, तो इसे जबरन सहमति हासिल करने का 'झूठा वादा' नहीं कहा जा सकता.