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हजारीबाग/डेस्क: राष्ट्रीय राजमार्ग-33 के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजा भुगतान में कथित अनियमितता से जुड़े करीब आठ साल पुराने मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), हजारीबाग ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. कार्रवाई 1 अक्टूबर 2026 को की गई. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मेरू निवासी बालेश्वर प्रसाद (69) और कटकमदाग थाना क्षेत्र के रामनगर निवासी प्रवीण कुमार सिन्हा (63) के रूप में बताई गई है.
ACB के अनुसार, दोनों आरोपी उस समय अलग-अलग पदों पर तैनात थे. बालेश्वर प्रसाद तत्कालीन अमीन, मांडू अंचल, रामगढ़ के पद पर कार्यरत थे, जबकि प्रवीण कुमार सिन्हा जिला भू-अर्जन कार्यालय, रामगढ़ के तत्कालीन प्रधान सहायक बताए गए हैं.
2018 में दर्ज हुई थी प्राथमिकी
मामले की शुरुआत हजारीबाग थाना कांड संख्या 13/2018, दिनांक 18 सितंबर 2018 से हुई थी. प्राथमिकी में तत्कालीन सहायक, प्रधान सहायक, अमीन, कानूनगो सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था.
ACB के मुताबिक प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120बी और 406 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं लगाई गई थीं.
1.92 एकड़ जमीन के मुआवजे से जुड़ा मामला
जांच का संबंध रामगढ़ जिले के मांडू अंचल अंतर्गत जोड़ाकरम मौजा की जमीन से बताया गया है. रिकॉर्ड के अनुसार खाता नंबर 126 और प्लॉट नंबर 2677 की कुल 1.92 एकड़ जमीन NH-33 चौड़ीकरण परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी.
इसी जमीन के लिए निर्धारित पंचाट संख्या-02 के तहत मुआवजा भुगतान में कथित अनियमितता किए जाने का आरोप जांच का हिस्सा है. ACB की जांच में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की गई थी.
अब आगे की जांच पर निगाह
करीब आठ वर्ष पुराने मामले में दो तत्कालीन कर्मियों की गिरफ्तारी के बाद जांच की दिशा एक बार फिर चर्चा में है. ACB की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि मामले में आरोपित तत्कालीन पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है.
हालांकि गिरफ्तारी और प्राथमिकी में लगाए गए आरोप अदालत में अभी साबित नहीं हुए हैं. मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा.
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