मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत
खलारी/डेस्क: पिपरवार थाना क्षेत्र के कारो निवासी झारखंड आंदोलनकारी नेता, रैयत विस्थापित मोर्चा के केंद्रीय सचिव एवं झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन के जोनल सदस्य रामचंद्र उरांव के निधन से कोयलांचल शोक में डूब गया. पोस्टमार्टम के बाद बुधवार को उनका पार्थिव शरीर कारो पहुंचा तो गांव का माहौल गमगीन हो गया. अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ के बीच परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था.
परिजनों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कीं. रामचंद्र उरांव के पार्थिव शरीर को झामुमो के झंडे में लपेटकर सम्मान दिया गया. सीसीएल प्रबंधन, प्रशासन, श्रमिक संगठनों, पंचायत प्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अंतिम दर्शन कर पुष्पांजलि अर्पित की. इस दौरान “रामचंद्र उरांव अमर रहें” और “जब तक सूरज चांद रहेगा, रामचंद्र जी तेरा नाम रहेगा” के नारों से वातावरण गूंजता रहा.
श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों ने रामचंद्र उरांव के सरल, मृदुभाषी और मिलनसार व्यक्तित्व को याद किया. वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के प्रति उनका विशेष लगाव था और वे लगातार विस्थापितों एवं मजदूरों के हक-अधिकार की आवाज उठाते रहे. उनके निधन को पार्टी, संगठन और पूरे कोयलांचल के लिए अपूरणीय क्षति बताया गया.
श्रद्धांजलि देने वालों में जेसीएमयू के जोनल अध्यक्ष फागु बेसरा, जोनल सचिव जय नारायण महतो, झामुमो हजारीबाग जिला अध्यक्ष संजीव बेदिया, सिमरिया विधानसभा के पूर्व झामुमो प्रत्याशी मनोज चंद्रा, जोनल उपाध्यक्ष इकबाल हुसैन, एनके अध्यक्ष बिगन सिंह भोक्ता, झामुमो खलारी प्रखंड अध्यक्ष श्यामजी महतो, प्रकाश यादव एवं रंथु उरांव सहित अन्य लोग शामिल रहे.
सीसीएल की ओर से कार्मिक एवं प्रशासनिक अधिकारी नागेश गोपाल, सीएचपी पीओ पीके सिंह, पंकज सिंह एवं पर्सनल मैनेजर हेमचंद महतो समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे. प्रशासन की ओर से पिपरवार थाना प्रभारी प्रशांत कुमार मिश्रा उपस्थित थे. एटक के मोहम्मद अब्दुल्ला, बिमल महतो, सिस्टा के बाबूलाल राम, झामुमो के धनेश्वर गंझु, विकास खालको, शिव प्रसाद चौहान, इंद्रजीत उरांव, सरना समिति कल्याणपुर के निर्मल उरांव, बालेश्वर उरांव, कारो कॉलेज के टिकेश्वर महतो, बसंत नारायण महतो, शिवशंकर साव, दिलीप महतो तथा काउंसिल की ओर से अंकुश राम समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.
अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि के बाद गांव से रामचंद्र उरांव की अंतिम यात्रा निकली. बड़ी संख्या में ग्रामीण और शुभचिंतक उनके पार्थिव शरीर के साथ गहरी नदी तट पहुंचे. वहां पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया. बड़े पुत्र गोविंद उरांव ने मुखाग्नि दी. इसके साथ ही झारखंड आंदोलनकारी एवं विस्थापितों-मजदूरों की आवाज रहे रामचंद्र उरांव पंचतत्व में विलीन हो गए. उनके जाने के बाद पीछे रह गईं उनकी यादें और क्षेत्र के लोगों के बीच उनके संघर्ष की छाप.
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