संतोष श्रीवास्तव/न्यूज़ 11भारत
पलामू/डेस्क: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जिला मानसिक स्वास्थ्य केंद्र पलामू के तत्वावधान में गुरुवार को एक सेमिनार आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन प्रभारी मनोचिकित्सक डॉ आशीष कुमार, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय, डॉ सुनील कुमार और असिस्टेंट वीर विक्रम वक्स राय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. सेमिनार में प्रभारी मनोचिकित्सक डॉ आशीष कुमार ने बताया कि अवसाद, चिंता और चिड़चिड़ापन आत्महत्या का मुख्य कारण हैं. उन्होंने मानसिक बीमारी और आत्महत्या के बीच के संबंध पर चर्चा करते हुए इससे बचाव के तरीके बताए. डॉ सुनील कुमार ने आत्महत्या के लिए जिम्मेदार सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और आर्थिक कारणों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि 15 से 45 वर्ष की उम्र के युवा और लोग इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं.
कानूनी और सहायता से जुड़ी जानकारी विस्तार से बताई गई
लीगल एड डिफेंस काउंसिल के डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय ने आत्महत्या से जुड़ी कानूनी जानकारियां और सहायता के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि जीवनशैली में बदलाव लाकर आत्महत्या को रोका जा सकता है. दुनिया भर में आत्महत्या के कारण हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत होती है और हर साल लगभग 8 लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं. तलाक, नौकरी छूटने या असफलता मिलने पर लोग ऐसा कदम उठाने की सोचने लगते हैं, इसलिए इन लक्षणों को समय रहते पहचानना जरूरी है. कार्यक्रम में वीर विक्रम वक्स राय ने जानकारी दी कि डालसा के माध्यम से जरूरतमंदों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जाती है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आत्महत्या के लिए उकसाने वाले व्यक्ति को 10 साल तक की सजा का कानूनी प्रावधान है.
इस कार्यक्रम का संचालन डॉ सुनील ने किया और धन्यवाद ज्ञापन जितेंद्र कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया. सेमिनार में मरीजों के परिजन, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल स्टाफ के सदस्य उपस्थित थे.
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