मनोज सिंह/न्यूज11 भारत
जमशेदपुर/डेस्क: जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र के बोड़ाम, पटमदा और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए लंबे समय से चली आ रही रेल कनेक्टिविटी की मांग अब साकार होने की दिशा में आगे बढ़ गई है. चांडिल से बोड़ाम, पटमदा, कटिन, बांदवान होते हुए झाड़ग्राम तक प्रस्तावित करीब 127 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) को रेलवे बोर्ड ने मंजूरी दे दी है. सर्वे के लिए 3.81 करोड़ रुपये की राशि भी स्वीकृत की गई है.
रेलवे बोर्ड की इस मंजूरी को बोड़ाम और पटमदा समेत पूरे ग्रामीण क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. वर्षों से इन इलाकों के लोग रेल संपर्क की मांग करते रहे हैं. वर्तमान में क्षेत्र के लोगों को मुख्य रूप से सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है. नई रेल लाइन बनने पर जमशेदपुर, चांडिल और पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम से क्षेत्र का सीधा रेल संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है. इससे आवागमन के साथ व्यापार, रोजगार और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलने की संभावना है.इस रेल परियोजना को लेकर जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो लंबे समय से प्रयासरत रहे हैं. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सांसद ने रेल मंत्री, रेलवे बोर्ड और संबंधित अधिकारियों के समक्षचांडिल–बोड़ाम–पटमदा–कटिन–बांदवान–झाड़ग्राम रेल मार्ग की आवश्यकता को लगातार उठाया है.
क्षेत्र भ्रमण के दौरान बोड़ाम और पटमदा के ग्रामीण भी सांसद से लगातार इस रेल लाइन की प्रगति को लेकर सवाल करते रहे थे. सांसद की ओर से इस दिशा में प्रयास जारी रखने का भरोसा दिया जाता रहा. अब फाइनल लोकेशन सर्वे की स्वीकृति के बाद क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी है कि वर्षों पुरानी मांग आगे बढ़ेगी...
पटमदा और बोड़ाम क्षेत्र कृषि प्रधान इलाकों में शामिल हैं. रेल संपर्क मिलने से किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिल सकती है. वहीं छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और रोजाना आवागमन करने वाले यात्रियों को भी सस्ता और सुविधाजनक परिवहन विकल्प मिलने की उम्मीद है.
रेल लाइन का विस्तार क्षेत्र में नए बाजार, छोटे कारोबार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा दे सकता है. चांडिल से झाड़ग्राम तक रेल संपर्क बनने से झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच इस ग्रामीण क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी.
हालांकि, फाइनल लोकेशन सर्वे की मंजूरी को रेल लाइन के निर्माण की अंतिम स्वीकृति नहीं माना जा सकता. सर्वे के बाद परियोजना की तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता, भूमि संबंधी प्रक्रिया तथा अन्य आवश्यक स्वीकृतियों के आधार पर आगे के चरण तय होंगे. इसलिए फिलहाल इसे रेल परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पड़ाव माना जा रहा है.
यह भी पढ़ें: लंबित कांडों के समयबद्ध निष्पादन, पर्यवेक्षण, निगरानी और अनुसंधान में जवाबदेही सुनिश्चित करने की अभिनव डिजिटल पहल