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रांची/डेस्क: रमजान के अलविदा जुमे की नमाज आज अकीदत के साथ अदा की जा रही हैं. जुमे के साथ ही आज अलविदा जुमे की नमाज को लेकर मस्जिदों में एक अलग ही रौनक देखने को मिल रही हैं. आज के दिन मस्जिदों में सभी लोग नए वस्त्र पहनकर नमाज अदा करने के लिए जाते हैं. अलविदा जुमे के दिन सभी मुस्लमान भाई-बहन सभी लोग अलविदा जुमे की नमाज अदा कर इबादत करते हैं. ऐसा कहा जाता है कि अलविदा जुमे में नमाज अदा कर लोग जो जायज दुआ मांगते हैं वह पूरी होती है. साथ ही अल्लाह की रहमत और बरकत मिलती है. साथ ही व्यक्ति को अपने गुनाहों की माफी मिलती है.
क्या है अलविदा जुमा
इस्लाम में माह-ए-रमजान में पड़ने वाले आखिरी जुमा को अलविदा जुमा कहा जाता हैं. ऐसा मानना है कि रमजान के तीसरे और आखिरी अशरे में की गई इबादत रोजेदारों को जहन्नुम यानी नर्क की आग से बचाती है. इस अशरे में जो आखिरी जुमा आता है उसे अलविदा जुमा कहते हैं. इस्लाम में इस दिन खासकर रमजान में नमाज पढ़ना जरूरी माना जाता है. और अलविदा जुमा की नमाज का अपना ही महत्व होता है. इस बार आज , 28 मार्च को अलविदा जुमा का नमाज अदा किया जाएगा.
रमजान का आखिरी जुम्मा क्यों है खास
अलविदा की नमाज हर मुसलमान के लिए बेहद खास होती है. इस दिन कुछ मुसलमान नए कपड़े पहन कर अपने रब की इबादत करते हैं. अलविदा को छोटी ईद भी कह सकते हैं. खुद अल्लाह ने पवित्र कुरआन शरीफ में इस दिन को मुसलमानों के लिए खास फरमाया है. इस दिन लोग रब की इबादत में अपना ज्यादा समय बिताते हैं. कहा जाता है कि अलविदा जुम्मा की नमाज के बाद सच्चे दिल से अगर अल्लाह से कोई फरियाद की जाए तो अल्लाह बंदे की हर जायद दुआ कुबूल करते हैं.
अलविदा जुमे के बाद मनाया जाता हैं ईद
यह भी मान्यता है कि जो लोग हज की यात्रा के लिए नहीं जा पाते अगर वे इस जुमे के दिन पूरी शिद्दत और एहतराम के साथ नमाज अदा करें तो उन्हें हज यात्रा करने के बराबर सवाब मिलता है. अलविदा जुमे को अरबी में जमात-उल-विदा के नाम से जाना जाता है. इसलिए अलविदा जुमा की नमाज दुनिया के हर मुसलमान के लिए बेहद खास होती है. वहीं, अलविदा जुमे के बाद ईद का पर्व मनाया जाता हैं.