न्यूज 11 भारत/पटना डेस्क: कटिहार जिले के बरारी प्रखंड क्षेत्र से मध्याह्न भोजन योजना से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।,,,,मामला उत्क्रमित मध्य विद्यालय मरघिया का है, जहां बताया जा रहा है कि पिछले करीब तीन-चार दिनों से बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन नहीं बनाया जा रहा है लेकिन विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा ई शिक्षाकोष पोर्टल पर करीब 300 छात्र छात्राओं का मध्यान भोजन देने का आंकड़ा दर्ज बताया जा रहा है।
आरोप है कि जब विद्यालय में एमडीएम का समय होता है तो बच्चों को भोजन करने के लिए अपने-अपने घर भेज दिया जाता है। यानी जिस वक्त बच्चों को स्कूल में बैठकर सरकार की ओर से मिलने वाला भोजन करना चाहिए, उस वक्त बच्चे भोजन के लिए घर जाने को मजबूर हैं।
इसको लेकर छात्र-छात्राओं के अभिभावकों में भी काफी रोष देखा जा रहा है। विद्यालय के कुछ शिक्षक सहित छात्र मोहम्मद तकबीर आलम, मोहम्मद मिराउल हक और आयुष कुमार ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से विद्यालय में मध्याह्न भोजन नहीं बन रहा है और एमडीएम के समय उन्हें भोजन करने के लिए घर भेज दिया जाता है।
लेकिन असली खेल उस समय उजागर हो गया जब ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर पिछले 3 दिनों का एमडीएम से जुड़ा विवरण दर्ज होने की बात सामने आई। विश्वसनीय सूत्र बताते हैं की पोर्टल पर करीब 300 छात्र-छात्राओं के मध्याह्न भोजन का विवरण दर्ज बताया जा रहा है।
अब सवाल यहीं से उठता है कि जब स्कूल के बच्चों और शिक्षक का कहना है, कि तीन-चार दिनों से भोजन नहीं बन रहा था, तो फिर ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर इतने बच्चों का एमडीएम दर्ज कैसे हुआ? विद्यालय में भोजन नहीं बना था तो फिर पोर्टल पर इसका विवरण कैसे दर्ज हुआ? इस पूरे मामले को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी राजकुमार सिंह ने बताया कि उन्हें सूचना मिली है कि उत्क्रमित मध्य विद्यालय मरघिया में तीन-चार दिनों से एमडीएम बंद था।
उन्होंने बताया कि मामले को लेकर संबंधित प्रधानाध्यापक, एमडीएम प्रभारी और एमडीएम के संवेदक, तीनों को नोटिस किया गया है। तीनों का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ई-शिक्षाकोष पोर्टल से भी विवरण निकाला जा रहा है और संबंधित लोगों का लिखित बयान लिया जा रहा है।
पोर्टल पर दर्ज विवरण और मौके की स्थिति का मिलान किया जाएगा और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ अग्रतर कार्रवाई की जाएगी। बच्चों की थाली क्यों रही खाली और पोर्टल पर एमडीएम का हिसाब कैसे दर्ज हुआ, इस पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही साफ होगी।