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रांची/डेस्क: केन्द्रीय गृह अमित शाह ने रविवार को गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती रेलवे स्टेशन से 1472 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण किया. इसी कार्यक्रम में उन्होंने देश की पहली LNG ट्रेन का शुभारंभ किया. यह न सिर्फ पारम्परिक ऊर्जा डीजल पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा. मगर यह सिर्फ एक नई तरह की ट्रेन की शुरुआत नहीं है, बल्कि इसके पीछे भविष्य एक बड़ी तैयारी भी हो रही है.
LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का भारत में काफी तेजी से विस्तार हो रहा है. यह ऐसी योजना है जिसमें कोयले को ग्रीन एनर्जी में बदला जा रहा है. भारत की ग्रीन एनर्जी का हिस्सा अभी 6.5% है, मगर सरकार 2030 तक इसे बढ़ाकर 15% तक ले जाना चाहती है. इसके लिए 500 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान पहले ही हो चुका है.
अनुमान है कि LNG, भारी ट्रांसपोर्ट में 30-40% तक डीजल की जगह ले सकता है. खबरों के अनुसार, पेट्रोनेट LNG 7 नए बड़े टैंक बना रही है. ये ओडिशा के गोपालपुर में 2 टैंक, केरल के कोच्चि में 1 टैंक, गुजरात के दहेज में 4 टैंक बनाए जा रहे हैं. 2025-26 में 2.65 करोड़ टन LNG का विकास किया गया.
एक असल खेल ऊर्जा पर विदेशों की निर्भरता कम करना भी है. क्योंकि एलएनजी पहले कतर से 40% आता था. मगर होर्मुज संकट के कारण इसकी सप्लाई 91% घट गई तो अमेरिका ने भारत को LNG सप्लाई करने लगा. सिर्फ मई-जुलाई 2026 में ही अमेरिका से 2.19 मिलियन टन एलएनजी सप्लाई किया.
सीधे शब्दों में कहा जाए तो LNG भारत की नई ट्रांजिशन एनर्जी के रूप में विकसित हो रही है. रविवार को लोको परियोजनाओं के उद्घाटन के समय अमित शाह ने कहा कि आज 12,000 हॉर्सपावर की ट्विन-सेक्शन क्षमता वाले एक ऐसे इंजन की शुरुआत हुई है, जो अकेले ही लगभग 600 ट्रकों जितना माल खींच सकता है.
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