कुमार चंदन/न्यूज11 भारत
चतरा/डेस्क: चतरा जिले में विकास के बड़े-बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई एक बार फिर सामने आ गई है. एसी कमरों और चमचमाती गाड़ियों में बैठकर जो नेता और अधिकारी विकास की गंगा बहाने की बात करते हैं, उनके मुंह पर एक गर्भवती महिला को खटिया पर ढोए जाने की यह तस्वीर करारा तमाचा है. कुंदा प्रखंड के सिकीदाग पंचायत में पुल के अभाव में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद ग्रामीणों को खुद ही जच्चा-बच्चा की जान बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी.
सोमवार को सिकीदाग पंचायत के बुटकुइया गांव में 28 वर्षीय रीता देवी प्रसव पीड़ा से तड़प रही थीं. परिजनों ने एंबुलेंस बुलाई, लेकिन दोमुहान नदी पर पुल नहीं होने और सड़क जर्जर होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी. स्थिति बिगड़ती देख ग्रामीणों ने इंसानियत की मिसाल पेश की और खटिया की व्यवस्था की. प्रसव पीड़ा से कराहती रीता देवी को खटिया पर लिटाकर ग्रामीण नदी पार करते हुए करीब एक किलोमीटर पैदल चले और मुख्य सड़क तक पहुंचाया. इसके बाद वाहन से उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुंदा ले जाया गया. ग्रामीणों का कहना है कि पहले नक्सलवाद के नाम पर विकास नहीं होता था, लेकिन अब जब कुंदा से नक्सलवाद का साया खत्म हो चुका है, तब भी विकास का पहिया अटका हुआ है.
बरसात के दिनों में नदी में पानी बढ़ने से गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है. मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यहां हर आपात स्थिति एक जानलेवा चुनौती बन जाती है. ग्रामीणों ने अब नेताओं के खोखले वादों से आजिज आकर प्रशासन से जल्द पुल और सड़क निर्माण की गुहार लगाई है. इस दर्दनाक तस्वीर पर कुंदा के बीडीओ साकेत कुमार सिन्हा ने भी बेबसी जताते हुए कहा कि यह खबर पूरी तरह सत्य है और इलाका सच में परेशानी झेल रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सड़क मनरेगा या 15वें वित्त से नहीं बन सकती. इसका निर्माण केवल DMFT फंड से संभव है, जिसके लिए ग्राम सभा कर चतरा उपायुक्त (DC) को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है. वहीं, डीसी रवि आनंद ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए बीडीओ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है ताकि इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके.
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