न्यूज11 भारत
मनोहरपुर/डेस्क: पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड में बाह्य स्रोत के तहत कार्यरत अनुबंध कर्मी पिछले 11 महीनों से मानदेय के लिए दर-दर भटक रहे हैं. वेतन नहीं मिलने से उनके परिवारों के सामने भूख और कर्ज की स्थिति उत्पन्न हो गई है.
कर्मचारियों ने बीडीओ को दिए ज्ञापन में बताया कि वे पिछले 10-12 वर्षों से मनरेगा अंतर्गत कंप्यूटर एसिस्टेंट,चालक और झाडुदार के पद पर कार्यरत हैं. पहले मानदेय का भुगतान मनरेगा एडमिन फंड से 2-3 महीने में हो जाता था, लेकिन रिट मोड्यूल लागू होने के बाद भुगतान प्रक्रिया बदल दी गई.
वर्ष 2022 से राइडर सिक्योरिटी लिमिटेड के माध्यम से भुगतान हो रहा है. लेकिन झारखंड ग्रामीण विकास विभाग से मिलने वाला आवंटन निर्धारित मानदेय से काफी कम है. कम्प्यूटर एसिस्टेंट का निर्धारित मानदेय ₹14800 है जबकि मिल रहा ₹10500 है. चालक का निर्धारित ₹12545 है जबकि मिल रहा ₹9105 है. सर्विस चार्ज और जीएसटी जोड़ने पर हर महीने कुल ₹18381 की कमी हो रही है.
इसी कारण वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 का 11 महीने का वेतन लंबित है. कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार विभाग और कंपनी से अनुरोध किया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला.
आवेदन में कर्मचारियों ने लिखा -बच्चों की पढ़ाई रुक रही है, राशन उधार चल रहा है, कर्ज हो गया है. कार्यालय आने-जाने का खर्च भी निकालना मुश्किल हो गया है."_कर्मचारियों ने बीडीओ से मांग की है कि मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित विभाग से आवंटन उपलब्ध कराते हुए उनका लंबित 11 माह का मानदेय अविलंब भुगतान कराया जाए.मौके पर बीडीओ को ज्ञापन सौंपते हुए अनुबंधकर्मी सुरेश कुमार गुप्ता, उंबुलेन लुगुन, सुशील कुमार गोप और सुनिता मुखी उपस्थित थे.
यह भी पढ़ें: LJP-R के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष ने दिल्ली में चिराग पासवान से की मुलाकात, प्रदेश से जुड़े विषयों पर की चर्चा