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रांची/डेस्क: राज्य में मरीजों को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और आवश्यक दवाएं आसानी से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं. अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों की प्रत्येक बिल्डिंग में जन औषधि केंद्र एवं अमृत फार्मेसी की सुविधा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा सभी जिला अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आवश्यकतानुसार जन औषधि केंद्र खोलने का निर्देश दिया गया है.
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को दवाओं एवं चिकित्सीय उपकरणों की खरीद तथा अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई. बैठक में विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, रिम्स के डॉ. पी. भट्टाचार्य, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला, ड्रग्स निदेशक रीतु सहाय सहित राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य एवं सिविल सर्जन उपस्थित थे.
बैठक में अपर मुख्य सचिव ने सबसे पहले मेडिकल कॉलेजों में अमृत फार्मेसी एवं जन औषधि केंद्र की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली. उन्होंने निर्देश दिया कि जिन मेडिकल कॉलेजों में अभी ये केंद्र उपलब्ध नहीं हैं, वहां 15 दिनों के अंदर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर इन्हें शुरू किया जाए. इस दौरान स्थानीय स्तर पर आने वाली किसी भी समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि रिम्स सहित राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों की सभी संबंधित बिल्डिंग में जन औषधि केंद्र एवं अमृत फार्मेसी की सुविधा उपलब्ध हो. इसके तहत रिम्स के मुख्य अस्पताल के साथ ट्रॉमा सेंटर, नेत्र संस्थान, दंत चिकित्सा संस्थान आदि में भी आवश्यकता के अनुसार इन केंद्रों की सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया.
इसी प्रकार सभी जिला अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जन औषधि केंद्र शुरू करने का निर्देश दिया गया है. ड्रग्स निदेशक तथा सभी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को 15 दिनों के भीतर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है. अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जन औषधि केंद्र एवं अमृत फार्मेसी ऐसे स्थानों पर खोले जाएं, जहां मरीजों और उनके परिजनों को आसानी से पहुंच मिल सके. इसके लिए रिसेप्शन के नजदीक, निकास द्वार अथवा मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास स्थान को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया.
उन्होंने सभी जन औषधि केंद्रों को बिजली एवं पानी की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराने को कहा. वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्थान की कमी होने पर आवश्यकता के अनुसार डिजाइन तैयार कर दुकान या काउंटर की व्यवस्था करते हुए जन औषधि केंद्र शुरू करने का निर्देश दिया गया, ताकि मरीजों को दवाएं लेने के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े. अपर मुख्य सचिव ने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी 15 दिनों के भीतर जन औषधि केंद्र शुरू करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक, तकनीकी या आधारभूत संरचना संबंधी समस्या आती है, तो उसका तत्काल समाधान किया जाए.
बैठक में अस्पतालों में उपलब्ध आवश्यक दवाओं के स्टॉक और मरीजों को दवा वितरण की व्यवस्था की भी विस्तृत समीक्षा की गई. अपर मुख्य सचिव ने सभी मेडिकल कॉलेजों एवं सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि आवश्यक दवाओं की सूची तैयार कर उनकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए और मरीजों को समय पर दवा उपलब्ध हो, इसकी लगातार निगरानी की जाए. दवाओं के स्टॉक, वितरण और उपलब्धता की नियमित समीक्षा करने का भी निर्देश दिया गया.
दवाओं की खरीद में कीमतों को लेकर भी अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों की तुलना में झारखंड में दवाओं की कीमत अधिक नहीं होनी चाहिए. दवाओं की खरीद में उचित और प्रतिस्पर्धी दर सुनिश्चित की जाए तथा विभिन्न राज्यों में प्रचलित दरों को ध्यान में रखते हुए खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए. उन्होंने मेडिकल कॉलेजों एवं जिलों के अधिकारियों को दवाओं की उपलब्धता, स्टॉक, वितरण व्यवस्था तथा जन औषधि केंद्र एवं अमृत फार्मेसी की स्थिति की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज कराने आने वाले मरीजों को आवश्यक दवाएं समय पर, आसानी से और उचित कीमत पर उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है.