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रांची/डेस्क: रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में करम महोत्सव 2026 का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया. पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा अखड़ा में पारंपरिक विधि-विधान के साथ करम डाली की स्थापना और पूजन के माध्यम से प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक जीवन के इस महान लोकपर्व को उल्लासपूर्वक मनाया गया. विभाग के नौ भाषाई विभागों के छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों ने लोकगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया.
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्य की कृषि मंत्री शिल्पा नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड की भाषा और संस्कृति ही उसकी असली पहचान है. यहाँ के पर्व-त्योहार मनुष्य और प्रकृति के गहरे संबंध को व्यक्त करते हैं तथा सहअस्तित्व और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का संदेश देते हैं. उन्होंने कहा कि करम केवल एक पर्व नहीं, बल्कि पुरखा, प्रकृति और मनुष्य को जोड़ने वाली सांस्कृतिक कड़ी है. करम वृक्ष और उससे जुड़ी परंपराएँ हमारे पारंपरिक ज्ञान की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें अखड़ा से निकालकर वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने की आवश्यकता है.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि झारखंड की संस्कृति अपनी मौलिकता और वैज्ञानिक दृष्टि के कारण विशिष्ट है. उन्होंने जनजातीय स्वाभिमान और पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया.
रांची विश्वविद्यालय का जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग लंबे समय से शैक्षणिक संस्थानों में झारखंडी पर्व-परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन की अनूठी परंपरा को आगे बढ़ाता रहा है. इसी क्रम में आयोजित करम महोत्सव में कुड़ुख विभागाध्यक्ष डॉ. बंदे खलखो ने पाहन की भूमिका निभाई, जबकि विभागाध्यक्ष डॉ. हरि उराँव ने करम कथा का वाचन किया. अतिथियों का स्वागत खड़िया विभाग द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत से किया गया तथा स्वागत भाषण खोरठा विभागाध्यक्ष डॉ. कुमारी शशि ने दिया. विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजकुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
इस अवसर पर पद्मश्री मुकुंद नायक, पद्मश्री मधुमंसूरी हंसमुख, पद्मश्री महावीर नायक, डीन प्रो. अर्चना कुमारी दुबे, प्रो. त्रिवेणी नाथ साहु, डॉ. सविता केशरी, डॉ. वृंदावन महतो, डॉ. महेश्वर सारंगी, डॉ. के.सी. टुडू, डॉ. एच.एन. सिंह सहित अनेक शिक्षाविद् और गणमान्य अतिथि उपस्थित थे.
कार्यक्रम का संचालन नागपुरी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. उमेशनंद तिवारी तथा हो विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ. दमयंती सिंकु ने किया. संथाली और हो विभाग के अध्यक्ष प्रेम मुर्मू के नेतृत्व में पारंपरिक हर्ष-उल्लास के साथ संपन्न इस आयोजन को सफल बनाने में मुडारी विभाग के अध्यक्ष डॉ. बिरेंद्र सोय, कुरमाल व पंचपरगनिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर सिंह मुंडा कुड़ुख विभाग के अध्यक्ष डॉ बंदे खलखो, खड़िया विभाग के अध्यक्ष डॉ किरण कुल्लू, प्राध्यापिका सुजाता टेटे, मुंडारी के प्राध्यापक डॉ. करम सिंह मुंडा, डॉ किशोर सुरीन, नागपुरी विभाग के डॉ. बीरेन्द्र कुमार महतो, , डॉ. रीझु नायक, डॉ मनोज कच्छप, खोरठा विभाग की प्राध्यापिका- डॉ. अर्चना कुमारी एवं विभिन्न विभागों के सहायक प्राध्यापक- डॉ. सरस्वती गगराई, डॉ अनुराधा, डॉ. निरंजन कुमार, डॉ. नकुल कुमार, डॉ. उपेंद्र कुमार, डॉ. राकेश किरण, गुरुचरण पुर्ती, अबनेजर टेटे, जय प्रकाश उराँव, डॉ. दिनेश कुमार दिनमणि एवं बिनय कुमार, प्रभा कुमारी, बसंती मुंडा, चंदा देवी के साथ ही सभी विभाग के शोधार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा.
करम महोत्सव 2026 ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि रांची विश्वविद्यालय का जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग केवल भाषा शिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि झारखंड की लोक-संस्कृति, प्रकृति-बोध और सामुदायिक चेतना का जीवंत संस्थान है.