शिवांश केशू/न्यूज11 भारत
गिरिडीह/डेस्क: विश्व प्रसिद्ध पारसनाथ पहाड़ को लेकर आदिवासी और जैन समुदाय के बीच विवाद तेज होता नजर आ रहा है .इस मामले को लेकर मारांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा ने विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष संजय जैन द्वारा पारसनाथ पहाड़ के संरक्षण और दावे पर अपना विरोध जताया है.इस बाबत मरांग बुरु संघर्ष मोर्चा द्वारा नया परिसदन भवन में प्रेसवार्ता आयोजित कर अपनी बाते रखी और विरोध .इस दौरान मोर्चा के सदस्यों ने बताया कि सदियों से पारसनाथ पहाड़ संथाल आदिवासियों का पवित्र धार्मिक स्थल ‘मारांग बुरू’ है, जहां आदिवासी समुदाय सदियों से पूजा-अर्चना और अपनी पारंपरिक धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करता आ रहा है.
संगठन का दावा है कि मारांग बुरू क्षेत्र में 24 से अधिक टोले हैं, जहां आज भी पारंपरिक माझी व्यवस्था लागू है. मोर्चा ने विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष संजय जैन के दावे को सिरे से खारिज कर दिया.मोर्चा के महावीर मुर्मू और सुधीर बास्के ने कहा कि न्यायालय ने हमारे पुरखौती अधिकार को मान्यता दी है. संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत हमारे अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए.
मोर्चा ने केंद्र और राज्य सरकार से जैन समुदाय के पक्ष में जारी एकतरफा आदेश को रद्द करने की मांग की है, और चेतावनी दी है कि अगर फैसला नहीं बदला गया तो आदिवासी समुदाय बड़ा आंदोलन करेगा.उन्होंने कहा कि मरांग बुरु ही पारसनाथ है यह सदियों से दर्ज है बाहर से आए हुए लोग साजिश कर रहे है शांति पवित्रता भाईचारे प्रेम को तोड़ना चाहते हैं यह आदिवासी समाज किसी भी शर्त पर बर्दास्त नहीं करेगा इसकी लड़ाई सड़क से सदन तक समाज लड़ेगा .मौके पर समाज के अध्यक्ष महावीर मुर्मू, सचिव विष्णु किस्कू, प्रवक्ता सुधीर बास्के, सुरेश हेमराम, मदन हेमराम, सुशांत प्रसाद सोरेन, दिलीप मुर्मू समेत अन्य लोग मौजूद रहे.
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