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रांची/डेस्कः- राजस्थान में पिछले 8 साल के बाद चतुर्त श्रेणी की परीक्षा ली जा रही है. 53 हजार 749 पदों के लिए इस पद पर 24 लाख 75 हजार लोगों ने आवेदन किया है. इसमें आपको साफ दिख सकता है कि देश मे पढ़े लिखे लोगों की बेरोजगारी किस स्तर पर है. राजस्थान में इस चपरासी के आवेदन के लिए 10 वीं पास निम्नतम क्राइटेरिया रखा गया है पर इसमें 85 प्रतिशत ग्रेजुएट, M.Sc, B.Tech और PHD धारकों ने अपना आवेदन दिया है. सबका कहना है कि कोई बड़े पदों पर नौकरियां नहीं आ रही है और जो भी आ रही है उसमें पेपर लिक हो जा रहा है.
परीक्षा देकर केंद्र से बाहर आ रहे छात्रों के बीच बस में बैठने को लेकर संघर्ष दिख रहा है, क्योंकि सीटें कम और अभ्यर्थी ज्यादा है. ज्यादातर एमएससी और बीटेक के छात्र टीवी पर अपना चेहरा नहीं दिखाना चाहते, उनका मानना है कि गांव वाले उन्हें बड़ा पढ़ा लिखा मानते हैं लेकिन वहीं चपरासी की परीक्षा देकर उन्हे बड़ी शर्मिंदगी महसूस हो रही है. जिन स्कूलों में यहां के छात्र बीएड की डिग्री ली उन्ही स्कूलों में वे घंटी बजाने व पानी पिलाने वाली नौकरी पाने को लेकर मजबूर हैं.
राज्सथान में पढ़े लिखे युवाओं में बेरोजगारी बढ़ने के सबसे बड़ी कारण है पेपर लीक का होना, इसीसे योग्य अभ्यर्थियों का चयन नहीं होता. साथ ही फर्जी सर्टिफिकेट व डमी कैंडिडेट हासिल करने के भी मामले सामने आए हैं. नकल माफियाओं के जड़ें इतनी ज्यादा गहरी हो गई है कि 1700 कैंडिडेट्स के फोटो डुप्लीकेट पाए गए हैं. जिन्हे परीक्षा से वंचित रखा गया है. इसे रोकने के लिए सख्त जांच भी हो रही है. अभ्यर्थियों को नंगे पांव परीक्षा देना पड़ रहा है. नाक-कान के गहने भी उतरवाए जा रहे हैं.
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