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Waqf Amendment Bill में क्या-क्या है शामिल? किसे होगा फायदा और किसे होगा नुकसान, समझे पूरी बात

Waqf Amendment Bill में क्या-क्या है शामिल? किसे होगा फायदा और किसे होगा नुकसान, समझे पूरी बात
न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क: वक्फ संशोधन बिल आज लोकसभा में पेश हो गया. इसके बाद इस बिल को पास करने के लिए वोटिंग की जाएगी. इस बिल को सरकार आज ही यानी बुधवार 02 अप्रैल को ही पास करने की तैयारी में है. वहीं विपक्ष की बात करें तो वह लगातार इस बिल का विरोध कर रही है. सरकार तो इसे राज्यसभा में पेश कर वह से भी पास कराने की तैयारी में जुट गई है. इस बिल के खिलाफ मुस्लिमों ने कई जगह काली पट्टियां बांधकर ईद की नमाज अदा की थी. यह उनका इस बिल का विरोध करने का तरीका था. आइये आपको बताते है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 में क्या है. 
 
वक्फ बिल सरकार का क्या है उद्देश्य?
बता दें कि दो बिल, वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 और मुसलमान वक़्फ़ (निरसन) बिल, 2024 को 8 अगस्त, 2024 में लोकसभा में पेश किया गया था. इसके पीछे का मकसद वक्फ की प्रॉपर्टीज का बेहतर मैनेजमेंट और वक्फ बोर्ड के काम को सुव्यवस्थित  करना है. इस बिल का मकसद अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है. ऐसा इसलिए ताकि वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट और रेगुलेशन में आने वाली चुनौतियों और समस्याओं किया जा सके. देश में वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट में सुधार करना संशोधन विधेयक का उद्देश्य है. इसका मकसद अधिनियम का नाम बदलने और पिछले कानून की खामियों को दूर करने जैसे जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्डों की कार्यकुशलता को बेहतर करना भी है. 
 
कौन है वक्फ मैनेजमेंट के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक निकाय और क्या है उनकी भूमिकाएं?
वक्फ संपत्तियों का रेगुलेशन भारत में वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत किया जाता है. मैनेजमेंट के लिए केंद्रीय वक्फ परिषद (सीडब्ल्यूसी), राज्य वक्फ बोर्ड (एसडब्ल्यूबी) और वक्फ ट्रिब्यूनल शामिल है. बता दें कि सरकार और राज्य वक्फ बोर्डों को केंद्रीय वक्फ परिषद नीतियों पर सलाह देती है, लेकिन यह वक्फ संपत्तियों को सीधे नियंत्रित नहीं करती है. वहीं प्रत्येक राज्य में राज्य वक्फ बोर्ड वक्फ संपत्तियों की देखभाल और सुरक्षा करते हैं.  वहीं वक्फ ट्रिब्यूनल विशेष न्यायिक निकाय होते हैं, यह वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों को निपटाने का काम करते है. 
 
क्या है वक्फ बोर्ड से संबंधित मुद्दे?
बता दें कि हमेशा से ही वक्फ संपत्तियों में बदलाव नहीं करने का नियम विवादित रहा है. एक सिद्धांत ने इसे लेकर विवादों को जन्म दिया है और वह सिद्धांत है ‘एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ’. दूसरा यह कि इसे लेकर मिसमैनेजमेंट और कानूनी विवाद पर भी सवाल उठते रहे हैं. बता दें कि वक्फ अधिनियम, 1995 और इसका 2013 का संशोधन प्रभावकारी नहीं रहा. इसके कारण वक्फ भूमि पर कुप्रबंधन, अवैध कब्ज़ा, मालिकाना हक़ का विवाद सर्वेक्षण में देरी और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और कई बड़े पैमाने में मुकदमें को लेकर चिंताएं जाहिर की जाती है. 
 
बता दें कि उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में इसे लेकर अभी तक सर्वेक्षण चालू नहीं हुए है. वहीं उत्तर प्रदेश में 2014 में आदेशित सर्वेक्षण अभी भी लंबित है. राजस्व विभाग के साथ खराब कोर्डिनेशन और विशेषज्ञता की कमी ने रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को धीमा कर दिया है. ऐसा कहा जाता है कि अपनी शक्तियों का कुछ राज्यों में वक्फ बोर्ड ने गलत इस्तेमाल किया है. इसके कारण से सामुदायिक तनाव पैदा हुआ है. इसके साथ यह भी आरोप है कि वक्फ अधिनियम की धारा 40 का दुरुपयोग निजी संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित करने के लिए किया गया है. इसके कारण अशांति और कनूइ लड़ाई पैदा हुई है. 
 
बिल पेश करने से पहले मंत्रालय क्या कदम उठाए? 
इस बिल को पेश करने से पहले विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने विचार विमर्श किए. इसमें जन प्रतिनिधियों,  मीडिया, आम जनता द्वारा कुप्रबंधन और सच्चर कमेटी की रिपोर्ट वक्फ अधिनियम की शक्तियों के दुरुपयोग के बारे में जाहिर की चिंताएं शामिल है. राज्य वक्फ बोर्डों से भी कानून मंत्रालय ने परामर्श किया. इसके बाद वक्फ अधिनियम, 1995 के प्रावधानों की समीक्षा की प्रक्रिया कानून मंत्रालय ने शुरू की. इसके बाद स्टेकहोल्डर्स के साथ परामर्श किया. प्रभावित स्टेकहोल्डर्स की समस्याओं को सुलझाने के लिए दो बैठकों में इस अधिनियम में उपयुक्त संशोधन करने के लिए आम सहमति बनी. 
 
 
क्या थी वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को पेश करने की प्रक्रिया?
वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और शासन में कमियों को दूर करने के उद्देश्य से वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को 8 अगस्त, 2024 को पेश किया गया था. इसके बाद के दिन यानी 9 अगस्त को दोनों सदनों यानी राज्यसभा और लोस्कभा में विधेयक को एक संयुक्त समिति के पास जांचने और उसपर रिपोर्ट देने के लिए भेजा था. इसके व्यापक निहितार्थों और महत्व को ध्यान में रखते हुए समिति ने विशेषज्ञों/स्टेकहोल्डर्स, आम जनता और अन्य संबंधित संगठनों से विचार लेने के लिए ज्ञापन आमंत्रित किया था. इसके लेकर संयुक्त संसदीय समिति ने कुल 36 बैठक की. इसमें विभिन्न मंत्रालयों, के प्रतिनिधियों के सुझाव सुने, जैसे कि रेलवे (रेलवे बोर्ड),अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, विधि एवं न्याय,संस्कृति (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण), राज्य सरकारें, राज्य वक्फ बोर्ड, आवास और शहरी मामलों, सड़क परिवहन और राजमार्ग और विशेषज्ञ. 
 



 

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