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देश-विदेश


आखिर क्या है वक्फ बोर्ड? पूरे देश में बना है चर्चा का विषय, आईए जानते हैं इसके इतिहास के बारे में..

सालाना 200 करोड़ कमाने के अलावे और भी है अकूत संपत्ति बोर्ड के पास
आखिर क्या है वक्फ बोर्ड? पूरे देश में बना है चर्चा का विषय, आईए जानते हैं इसके इतिहास के बारे में..

न्यूज11 भारत

रांची/डेस्कः- वक्फ बोर्ड का इतिहास ब्रिटिश शासन काल में ही शुरु हो गया था. कहा जाता है कि 1913 में इस बोर्ड की शुरुआत हुई थी और 1923 में इस अधिनियम को बनाया गया था. 1954 में वक्फ बोर्ड में संशोधन किया गया था. जिसके बाद 1964 में केंद्रीय वक्फ परिषद की स्थापना हुई थी. 
 
लोकसभा में बुधवार को बीजेपी की सरकार ने वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पेश किया है. संशोधन में कहा गया है कि अब इस बोर्ड में गैर-मुस्लिम लोग भी शामिल हो सकते हैं. महिलाओँ को भी बोर्ड का हिस्सा बनाया जा सकता है. इसको लेकर हाई कोर्ट में चुनौती भी दी जा सकती है जिसके अधिकार का प्रावधान पहले के कानुन में नहीं था. ऐसे ही कई बदलावों को लेकर किरन रिजिजू ने सदन मे बिल पेश किया है. 
 
आखिर क्या है वक्फ
वक्फ अरबी भाषा के वकुफा से बना है जिसका अर्थ होता है ठहरना, वक्फ एक ऐसी संपत्ति है जिसे जन कल्याण के लिए समर्पित किया जाता है. इस्लामिक नजरिए से देखा जाए तो वक्फ दान करने का ही एक तरीका है. वक्फ एक साइकिल से लेकर बहुमंजिला इमारत तक कुछ भी हो सकता है. हां वो सारा संपत्ति जनकल्याण के नजरिए से होना चाहिए. ऐसे दानदाता को कहा जाता है वाकिफ. वाकिफ से ये तय होता है जिसे दान किया गया हो. कोई वाकिफ ये कह सकता है कि वक्फ से होने वाली कमाई का खर्च गरीबों पर ही होनी चाहिए. 
 
10वीं सदी की वक्फ
माना जाता है कि पैगंबर मोहम्मद के टाइम 600 खजूर के पेड़ो का एक बाग बनाया गया था. जिससे होने वाली आमदनी से गरीब लोगों की मदद की जाती थी. ये वक्फ के सबसे पहले उदाहरण के तौर पर देखा जाता है. मिस्र की राजधानी काहिरा में बनी अजहर विश्वविद्यालय अरबी संस्कृति व भाषा के लिए काफी प्रसिद्ध जगह मानी जाती है, बता दें कि ये युनिवर्सिटी वक्फ का ही रुप माना जाता है. यह 10वीं सदी में बनी थी. 
 
भारत में इस दिन बना Waqf Board
भारत की आजादी के बाद पुरा देश में पसरी वक्फ की संपत्ति का स्ट्रक्चर बनाने की शुरुआत हुई. इसी को लेकर संसद ने 1954 में वक्फ एक्ट 1954 की शुरूआत की थी. इसी का परिणाम है कि वक्फ बोर्ड बनाया गया. इसी के अंतर्गत सारी वक्फ की संपति आ गई. यह एक ट्रस्ट था. इसके साथ ही 1995 में एक नया वक्फ बोर्ड एक्ट आया और 2013 में इसमें संशोधन किए गए. अभी जो व्यवस्था है इन्ही कानून व संशोधन के तहत चल रही है. सामान्यता मुस्लिम धर्मस्थल वक्फ बोर्ड के अंदर ही आता है पर ये कानून अजमेर शरीफ दरगाह पर लागू नहीं होता है. इसके लिए अलग से एक्ट बना था दरगाह साहिब एक्ट 1955.
 
वक्फ की संपत्ति
वक्फ बोर्ड भले ही सालाना 200 करोड़ कमाता हो पर इसके अलावे उसके पास अकूत संपत्ति भी है. एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में इस बोर्ड के पास 8 लाख 72 हज़ार 292 संपत्तियां हैं, यह 8 लाख एकड़ से भी ज्यादा में फैली हुई है. इसमे से काफी इमारत सांस्कृतिक धरोहर की तरह ही है. ऐसे में इस कानून के बदलाव में बहुत बारीक नजर रखी जा रही है. 

 
 
 
 
 
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