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रांची/डेस्क: होली की मस्ती हो या फिर दिवाली के धूम-धड़ाके, इनसे कोई भी बचना भी नहीं चाहता और नहीं पबांदियों की कोई परवाह करता है. बावजूद इसके जब इसका सम्बंध पर्यावरण से हो तो थोड़ी परवाह तो करनी ही चाहिए. हर साल जब भी दिवाली आती है, राज्यों के हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से पटाखों के चलाए जाने को लेकर तरह-तरह की पाबंदियां लगाई जाती हैं, फिर भी लोग कहां मानने वाले हैं. इतना पटाखे फोड़ दिए जाते हैं कि पर्यावरण का सत्यानाश हो जाता है.
मगर इस बार सुप्रीम कोर्ट ने अगली पीढ़ी के हरित पटाखे चलाए जाने को लेकर अपनी मंजूरी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी है कि हरित पटाखे (ग्रीन पटाखे) का निर्माण किया जा सकता है और उनकी बिक्री की जा सकती है.
बता दें कि ग्रीन पटाखे (Green Crackers) आम पटाखों जैसे ही दिखते और फूटते हैं, लेकिन इनके फूटने से प्रदूषण की मात्रा कम होती है. चूंकि इनसे प्रदूषण 30-40% कम होता है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के द्वारा इन्हें चलाने की मंजूरी मिली है. ग्रीन पटाखों से चूंकि हानिकारक बेरियम नाइट्रेट हटा दिया जाता है, इसलिए इससे धुआं कम होता है. आवाज भी पारम्परिक पटाखों से कम होती है. इसमें ध्यान रखा जाता है कि आवाज 125 डेसीबल से ज्यादा न हो. मगर यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि ग्रीन पटाखे पूरी तरह से ईको फ्रेंडली नहीं होते हैं.
कैसे पहचान करेंगे ग्रीन पटाखों की?
ग्रीन पटाखे खरीदना चाहते हैं तो इसकी पहचान बॉक्स से ही हो जाएगी. हर ग्रीन पटाखे के बॉक्स पर NEERI का हरा लोगो तो होगा ही साथ ही QR Code से भी इसकी पहचान की जा सकती है. QR को स्कैन करने पर NEERI की साइट से असली-नकली का पता चल जाएगा.
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