प्रमोद जायसवाल/न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: भारत में इस समय पितृपक्ष चल रहा है. पितृपक्ष में हिंदू अपने पितरों को याद करते हैं. उनका पिंडदान करते हैं. जल का तर्पण करते हैं. उनके लिए भोजन बनाते हैं और कौओं, कुत्तों, गायों को खिलाते है. मान्यता है कि इनके माध्यम से ये भोजन उनके पितरों को प्राप्त हो रहा है. पितरों को याद करने की यह परम्परा 16 दिनों तक निभाई जाती है. 16वें दिन सर्वपितृपक्ष के साथ जब वातावरण शुद्ध हो जाता है तब महालया के दिन मां दुर्गा स्वर्ग से धरती पर आती हैं और 10 दिनों को दुर्गोत्सव पूरे धूमधाम से मनाया जाता है.
पितृपक्ष, जैसा कि इस नाम से ही स्पष्ट है कि यह पितरों को स्मरण करने का अवसर है. अपने पितरों को याद करते समय मन में यह विचार आता है कि जिस तरह से हम अपने पितरों को याद करते हैं, क्या उसी तरह से दुनिया की दूसरी संस्कृतियों में भी अपने पितरों को याद करने की परम्परा है? इसका जवाब हां है. दुनिया भर में अपने पितरों को अलग-अलग तरीके से याद किया जाता है. कहीं-कहीं तो जश्न-जैसा उत्सव भी मनता है.
तो आइए जरा देखते हैं कि किन देशों में पितरों को याद करने की कौन-कौन सी परम्पराएं हैं-
मेक्सिको
मैक्सिकों में अपने पितरों को याद करने का यहां विशेष दिन होता है जिसे Día de los Muertos यानी मृतकों का दिन कहा जाता है है. यह प्रतिवर्ष अंग्रेजी कलेंडर के 1-2 नवंबर को मनाया जाता है. मैक्सिको का यह दिवस यूनेस्को हेरिटेज के रूप में दर्ज है. इस दिन लोग कब्रिस्तान को अच्छे से सजाते हैं, खोपड़ी के आकार की मिठाई बनाते हैं. यहां के लोग यह मानते हैं कि मानते हैं कि इस दिन आत्माएं वापस धरती पर अपने घर आती हैं. देखा जाए यो यह बिल्कुल भारतीय पितृपक्ष जैसा. अन्तर इतना है कि मैक्सिकों में इस समय जश्न जैसा माहौल होता है.
चीन
चीन दुनिया की प्राचीतम संस्कृतियों वाला देश है, इसलिए पितरों को याद करने जैसी परम्पराएं होना स्वाभाविक है. चीन में Qingming Festival (चिंगमिंग) और Hungry Ghost Festival मनाया जाता है. चीन में भी चिंगमिंग में कब्र साफ करते हैं. वहां खाना चढ़ाते हैं. कागज की मुद्रा जलाते हैं. ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि उनके द्वारा अर्पित किया गया भोजन और मुद्रा उनके पितरों को परलोक में पैसा मिल जाएंगे.
Hungry Ghost Month अगस्त में मनाया जाता है. यह भी बहुत कुछ हमारे पितृपक्ष जैसा ही होता है. मान्यता है कि इस महीने परलोक के दरवाजे खुल जाते हैं और पितर धरती पर आते हैं.
जापान
जापान में बौद्ध परम्परा है. बौद्ध परम्परा चूंकि भारत से जन्मी है और बौद्धों की मान्यताएं हिंदू मान्यताओं के काफी नजदीक हैं, इसलिए जापान में पितरों को याद करने की परम्परा होना कोई आश्चर्य उत्पन्न नहीं करता है. जापान में Obon Festival मनाया जाता है. बौद्ध परंपरा के अनुसार, जुलाई-अगस्त में 3 दिन लालटेन जलाकर पितरों का रास्ता दिखाया जाता है. इन दिनों लोग बोन डांस करते हैं ताकि आत्माएं खुश होकर वापस धरती पर आएं. अंत में लालटेन को नदी में बहा देते हैं.
कोरिया
कोरिया में Chuseok पितरों को याद करने की मान्यता का नाम है. यह भी हमारे श्राद्ध जैसा ही है. इस दिन चावल से बनी मिठाई और नया अनाज पितरों को चढ़ाते हैं, फिर परिवार एक साथ खाता है.
अमेरिका और यूरोपीय देश
अमेरिका और यूरोप में भी पितरों को याद करने की कई तरह की मान्यताएं हैं.
31 अक्टूबर को All Souls' Day और Halloween की रात मानया जाता है. मान्यता है कि इस दिन मृत आत्माएं घूमती हैं.
2 नवम्बर को All Souls' Day मनाया जाता है. इस दिन चर्च में पितरों के लिए प्रार्थना और मोमबत्ती जलाते हैं.
अफ्रीका
नाइजीरिया, बेनिन में Egungun Festival मनाया जाता है. मान्यता है कि पूर्वजों की आत्मा कपड़ों में धरती पर आती है. उनके स्वागत में लोग नाचते हैं. मानते हैं कि उनके पितर उनके गांव की रक्षा करेंगे.
इंडोनेशिया (बाली)
इंडोनेशिया में Galungan उत्सव मनाने की परम्परा है. पितर 10 दिन के लिए धरती पर आते हैं. इनके लिए बांस के ऊंचे तोरण बनाये जाते हैं.
मेडागास्कर
पूरी दुनिया में पितरों को याद करने की जो भी परम्पराएं हैं उनमें सबसे अनोखी परम्परा मेडागास्कर में है. Famadihana यानी हड्डी पलटने का त्यौहार यहां मनाया जाता है. हर 7 साल में पितरों की कब्र खोलकर उनकी हड्डियों को निकाला जाता है. कंकाल को नए कपड़े पहनाये जाते हैं. फिर संगीत के साथ नाचते हुए वापस दफना दिया जाता है.
दुनिया में अनेक परम्पराएं हैं, फिर भी कुछ बातें हैं कॉमन
- दक्षिण और पश्चिम दिशा को पितरों की दिशा मानना
- कौए, चावल, तिल, पानी से तर्पण
- पितर के खुश होने की मान्यता
- पितरों को याद करना सिर्फ हिंदुओं ही नहीं, पूरी दुनिया की परंपरा है
यह भी पढ़ें: PNR अंक बदले दिखें तो चौंकियेगा नहीं! अब नए नम्बरों से शुरू होगा PNR, रेलवे ने क्यों बदला 1986 से चला आ रहा सिस्टम?*